वसई-विरार, 28 अक्टूबर 2026 | मेट्रो सिटी समाचार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक 19 के नगरसेवक अरशद चौधरी की कानूनी पात्रता की जांच करने की मांग सामने आई है। नालासोपारा पूर्व निवासी अब्दुलराब खान ने महानगरपालिका आयुक्त को एक लिखित शिकायत देकर कथित अवैध निर्माण और महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act), 1966 के तहत दर्ज बताए जा रहे मामलों की आधिकारिक जांच कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में संबंधित नगरसेवक के खिलाफ महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 के अंतर्गत अयोग्यता की कानूनी शर्तें पूरी होने की पुष्टि होती है, तो सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, नगरसेवक अरशद चौधरी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। शिकायत पत्र में उल्लिखित कथित आपराधिक मामलों की वर्तमान स्थिति और संबंधित नगरसेवक की भूमिका की जांच होना अभी बाकी है।

आयुक्त से मुलाकात कर सौंपा शिकायत पत्र

शिकायतकर्ता अब्दुलराब खान के अनुसार, उन्होंने 28 अक्टूबर को वसई-विरार महानगरपालिका आयुक्त से मुलाकात कर वार्ड क्रमांक 19 से जुड़े कथित अवैध निर्माण और नगरसेवक की पात्रता के मुद्दे को उनके संज्ञान में लाया।

उन्होंने शिकायत में मांग की है कि संबंधित पुलिस थाने, महानगरपालिका के नगररचना विभाग और अन्य सक्षम कार्यालयों से आधिकारिक रिकॉर्ड मंगवाकर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।

शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि संबंधित नगरसेवक के विरुद्ध MRTP अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध दर्ज है, तो उसकी FIR, अपराध क्रमांक, लागू धाराओं, आरोपपत्र और न्यायालयीन कार्यवाही की वर्तमान स्थिति की जांच की जाए।

नगरसेवक अरशद चौधरी के खिलाफ क्या है शिकायत?

अब्दुलराब खान द्वारा आयुक्त को दिए गए पत्र में नगरसेवक अरशद चौधरी के विरुद्ध MRTP कानून के तहत अपराध दर्ज होने की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित मामले किस निर्माण कार्य से जुड़े हैं, उन निर्माणों की कानूनी स्थिति क्या है और उनमें नगरसेवक की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका रही है या नहीं।

इसके अतिरिक्त यह जांच करने की भी मांग की गई है कि संबंधित नगरसेवक या कानून में परिभाषित उनके आश्रितों का किसी अनधिकृत निर्माण से संबंध है अथवा नहीं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। केवल शिकायत दर्ज होने या FIR होने के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी अथवा नगरसेवक पद के लिए अयोग्य नहीं माना जा सकता।

महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धाराओं का दिया हवाला

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 10(1D), 11 और 12 का उल्लेख किया है।

आवेदन के अनुसार, यदि किसी नगरसेवक के संबंध में अनधिकृत निर्माण करने, उसमें कानून के अंतर्गत आने वाली सहायता प्रदान करने अथवा सक्षम अधिकारियों की कार्रवाई में बाधा पहुंचाने जैसी परिस्थितियां स्थापित होती हैं, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी अयोग्यता का प्रश्न उठ सकता है।

शिकायत में 23 मार्च 2021 के बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्णपीठ के एक निर्णय का भी हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच करते समय निर्माण कार्य की अवधि और नगरसेवक की भूमिका पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि, किसी निर्वाचित नगरसेवक की अयोग्यता का अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रावधानों, प्रमाणों और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकता है।

FIR से लेकर निर्माण संबंधी दस्तावेजों तक जांच की मांग

अब्दुलराब खान ने शिकायत में मांग की है कि महानगरपालिका संबंधित निर्माण कार्यों की नोटिस, पंचनामे, प्रशासनिक आदेश और उपलब्ध अन्य रिकॉर्ड की जांच करे।

साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि संबंधित मामलों में पहले कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं और यदि कार्रवाई लंबित है तो उसका कारण क्या है।

शिकायतकर्ता ने संबंधित नगरसेवक को अपना पक्ष रखने का अवसर देने और पूरी प्रक्रिया राजनीतिक अथवा प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखने की भी मांग की है।

शिकायत की प्रतियां वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने का उल्लेख

आयुक्त को संबोधित आवेदन में महाराष्ट्र शासन के नगरविकास विभाग के प्रधान सचिव, राज्य निर्वाचन आयुक्त, पालघर जिलाधिकारी और मीरा-भाईंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्त को प्रतिलिपि भेजने का उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ता ने महानगरपालिका से प्राथमिक जांच की कार्रवाई और आगे उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया है।

‘कानून से ऊपर कोई नहीं’ — अब्दुलराब खान

आयुक्त से मुलाकात के बाद अब्दुलराब खान ने कहा कि उन्होंने वार्ड क्रमांक 19 में कथित भू-माफियागिरी और नगरसेवक से जुड़े गंभीर मुद्दों को प्रशासन के सामने रखा है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

खान ने कहा, “कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे पद कितना भी बड़ा क्यों न हो!”

अब महानगरपालिका की कार्रवाई पर नजर

इस शिकायत के बाद महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या महानगरपालिका संबंधित पुलिस और नगररचना विभाग से रिकॉर्ड मंगवाकर जांच शुरू करेगी?

क्या शिकायत में उल्लिखित कथित MRTP मामलों और नगरसेवक की पात्रता के बीच कोई कानूनी संबंध स्थापित होता है?

इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

नगरसेवक अरशद चौधरी का पक्ष: इस समाचार के लिए उनका स्वतंत्र पक्ष अभी उपलब्ध नहीं है। उनका जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।

फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा उठाई गई जांच की मांग तक सीमित है। किसी भी आरोप को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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