वसई-विरार/मुंबई, 28 अक्टूबर 2026: वसई-विरार महानगरपालिका की प्रभाग समितियों की सीमाएं बदलने के फैसले पर महाराष्ट्र शासन ने रोक लगा दी है। नगर विकास विभाग ने 20 मार्च 2026 की महासभा में पारित ठराव क्रमांक 03 को प्रथमदृष्टया निलंबित किया है। शासन ने नागरिकों की संभावित असुविधा और प्रशासनिक कामकाज में कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए यह निर्णय लिया है।

भाजपा की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण में इस फैसले को अपने विरोध और लगातार किए गए प्रयासों की सफलता तथा बहुजन विकास आघाडी के लिए राजनीतिक झटका बताया गया है। हालांकि, सरकारी आदेश में ठराव को अंतिम रूप से रद्द नहीं किया गया है। संबंधित पक्षों को अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के लिए 30 दिन का अवसर दिया गया है।

नौ में से सात प्रभाग समितियों की सीमाओं में बदलाव

उपलब्ध शासन निर्णय के अनुसार, 20 मार्च 2026 के ठराव के जरिए तैयार नई संरचना में नौ प्रभाग समितियों में से सात की सीमाओं में बदलाव हुआ था। शासन ने विशेष रूप से प्रभाग समिति ‘ए’ और ‘बी’ के क्षेत्रफल तथा नागरिकों की पहुंच से संबंधित मुद्दों को सामने रखा है।

आदेश में बताया गया है कि प्रभाग समिति ‘ए’ का क्षेत्रफल लगभग 65.68 वर्ग किलोमीटर हो गया था, जबकि महानगरपालिका के सार्वत्रिक चुनाव के समय इसका क्षेत्रफल लगभग 33.43 वर्ग किलोमीटर था। प्रभाग समिति ‘बी’ का नया क्षेत्रफल लगभग 12.52 वर्ग किलोमीटर बताया गया है।

रेलवे लाइन और कार्यालय तक पहुंच की असुविधा का उल्लेख

शासन निर्णय के मुताबिक, नई संरचना में प्रभाग समिति ‘बी’ की सीमा से रेलवे लाइन गुजरती है। आदेश में कहा गया है कि नई ‘ए’ और ‘बी’ प्रभाग समितियों के कार्यालय नागरिकों के लिए असुविधाजनक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से संचालित करने में भी कठिनाइयां आने की आशंका व्यक्त की गई है।

इस प्रकार आदेश का प्रमुख आधार प्रभाग समिति कार्यालयों की सुविधा, प्रशासनिक संचालन और व्यापक लोकहित से जुड़ा है। इसे नगरसेवकों के चुनाव वाले सभी वार्डों की सीमाएं रद्द होने का फैसला समझना उचित नहीं होगा।

आयुक्त के 1 अक्टूबर के पत्र के बाद शासन का निर्णय

आदेश में महानगरपालिका आयुक्त के 1 अक्टूबर 2026 के पत्र का संदर्भ दिया गया है। उसमें व्यक्त अभिप्राय पर विचार करते हुए शासन ने ठराव को महानगरपालिका के आर्थिक, प्रशासनिक और व्यापक लोकहित के विरुद्ध प्रथमदृष्टया पाया है।

इसके आधार पर महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 451(1) के अंतर्गत ठराव को प्रथमदृष्टया निलंबित किया गया है। आदेश में इस्तेमाल किया गया यह शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंतिम निरस्तीकरण से अलग स्थिति है।

भाजपा ने अपने प्रयासों की सफलता बताया

भाजपा की ओर से प्राप्त विवरण के अनुसार, पार्टी ने महासभा में इस प्रस्ताव का विरोध किया था। पार्टी का कहना है कि विधायक राजन नाईक और विपक्ष के नेता मनोज पाटील के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी. से मिलकर नई प्रभाग समिति संरचना पर आपत्तियां रखी थीं।

भाजपा का आरोप है कि बविआ ने बहुमत के आधार पर ऐसी संरचना पारित कराई, जिससे प्रशासनिक कठिनाइयां और नागरिकों की असुविधा बढ़ती। पार्टी ने शासन के फैसले को अपने कानूनी और राजनीतिक प्रयासों का परिणाम बताया है। ये भाजपा के दावे हैं; उपलब्ध सरकारी आदेश किसी पार्टी की राजनीतिक भूमिका या आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं देता।

इस फैसले पर बहुजन विकास आघाडी की प्रतिक्रिया उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है। उसका पक्ष प्राप्त होने पर खबर में जोड़ा जाएगा।

30 दिनों में अभ्यावेदन का अवसर, अभी अंतिम रद्दीकरण नहीं

शासन निर्णय में धारा 451(2) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि निलंबन के संबंध में अभ्यावेदन देने के इच्छुक संबंधित पक्ष आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर शासन को अपना निवेदन प्रस्तुत करें।

फिलहाल स्पष्ट स्थिति यह है कि 20 मार्च का संबंधित ठराव निलंबित किया गया है। आगे की प्रभाग समिति व्यवस्था, कार्यालयों की सीमाओं और प्रशासनिक अमल को लेकर महानगरपालिका अथवा शासन के अगले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। उपलब्ध आदेश के आधार पर पुरानी सीमाएं स्वतः बहाल होने या पूरी प्रक्रिया समाप्त होने का दावा नहीं किया जा रहा है।

स्रोत: उपलब्ध कराई गई महाराष्ट्र शासन, नगर विकास विभाग के 28 अक्टूबर 2026 के शासन निर्णय की प्रति और भाजपा की ओर से प्राप्त विवरण। आदेश के तथ्य और राजनीतिक दावे अलग-अलग प्रस्तुत किए गए हैं।