उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 1 नवंबर को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर है। गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेशी के बाद यह आदेश हुआ। खबरों में हिरासत की अवधि 14 दिन बताई गई है।
गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेशी
ED ने खान को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। इससे पहले उन्हें दूसरे मामले में रामपुर जेल से रिहा किया गया था। इसलिए पिछली रिहाई और इस मामले में हुई कार्रवाई को एक ही आदेश का हिस्सा नहीं समझना चाहिए।
अगले दिन अदालत में पेशी हुई। उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग अदालत-नाम और हिरासत खत्म होने की तारीख के विवरण मिले हैं। मूल आदेश उपलब्ध नहीं होने के कारण इस रिपोर्ट में सटीक अगली तारीख नहीं दी जा रही है।
संपत्तियों पर ED का क्या कहना है?
ED की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, लखनऊ जोन ने जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों से जुड़ी ₹426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है। एजेंसी ने इसका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹1,170 करोड़ बताया है। ये दो अलग आधारों के आंकड़े हैं, इन्हें जोड़कर कुल जब्ती राशि नहीं माना जाना चाहिए।
एजेंसी ने यह कार्रवाई ट्रस्ट, आजम खान और अन्य से संबंधित जांच के तहत बताई है। यह ED का जांच संबंधी पक्ष है; इससे आरोप अपने-आप साबित नहीं हो जाते।
बचाव पक्ष की आपत्ति
खान के वकील दानिश अली के हवाले से सामने आई जानकारी में गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि पुराना मामला होने और खान के पहले से हिरासत में रहने के दौरान दूसरी प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी। उन्होंने PMLA की धारा 19 के पालन पर भी आपत्ति जताई।
ये बचाव पक्ष की दलीलें हैं। उपलब्ध सामग्री से उन पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष स्पष्ट नहीं है।
अभी किस बात का इंतजार है?
अदालत का विस्तृत आदेश, आगे की सुनवाई और जांच की प्रगति से स्थिति साफ होगी। न्यायिक हिरासत को दोषसिद्धि या अंतिम सजा नहीं लिखा जा रहा है। इस रिपोर्ट में किसी नई जमानत, पूछताछ की अवधि या अगली पेशी की असत्यापित तारीख का दावा नहीं किया गया है।




