लखनऊ: पीलीभीत में मतदाता सूची से जुड़ी गड़बड़ियों और लॉगिन के कथित दुरुपयोग के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने पूरे प्रदेश में कंप्यूटर सहायकों की ECINET पोर्टल ID तत्काल निष्क्रिय करने को कहा है। शनिवार, 31 अक्टूबर के निर्देश मतदाता पंजीकरण केंद्रों में तैनात ऑपरेटरों से संबंधित हैं।
किसका एक्सेस रोकने का निर्देश?
राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में तैनात 806 कंप्यूटर सहायकों के लॉगिन पर यह कदम लागू बताया गया है। हर क्षेत्र में दो सहायक हैं। संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO को ID निष्क्रिय होने की पुष्टि करनी है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने क्षेत्र में पालन जांचकर रिपोर्ट भेजनी है।
यह मतदाताओं के वोटर ID या नाम स्वतः रद्द करने का आदेश नहीं है। पोर्टल पर काम करने वाले सहायकों की अनुमति और किसी नागरिक की मतदाता प्रविष्टि अलग चीजें हैं। किसी व्यक्ति की प्रविष्टि पर असर समझने के लिए उसके रिकॉर्ड और संबंधित निर्णय को अलग से देखना होगा।
पीलीभीत की जांच में क्या सामने आया?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के हवाले से मिली जानकारी में 31 मई से 29 अगस्त के बीच 13,779 फॉर्म गलत तरीके से दर्ज होने और इनमें 10,470 स्वीकृत होने की बात है। ये फॉर्म और स्वीकृतियों के आंकड़े हैं; इन्हें उतने ही मतदाताओं का नाम अंतिम रूप से हटने का आंकड़ा नहीं कहा जा सकता।
पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र 127 से जुड़े मामले में कथित रूप से शामिल आउटसोर्स कंप्यूटर सहायक की सेवा तत्काल समाप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कथित दुरुपयोग की जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच और कार्रवाई से अलग से होना है।
आगे जिम्मेदारी कैसे तय होगी?
निर्देश के अनुसार जिला स्तर पर अनुपालन की पुष्टि जरूरी है। रिपोर्ट किए गए नए प्रबंध में संबंधित बूथ के BLO से फॉर्म जमा कराने और ERO के अपने लॉगिन से निगरानी की भूमिका बताई गई है। इसका उद्देश्य हर प्रविष्टि की जिम्मेदारी स्पष्ट रखना है।
राज्यव्यापी निर्देश जारी होने और हर जगह वास्तव में ID बंद हो जाने में फर्क है। इस जांच में सभी जिलों का पूरा अनुपालन प्रमाण उपलब्ध नहीं मिला है; इसलिए पूरे प्रदेश में प्रक्रिया पूरी होने का दावा नहीं किया जा रहा है।




