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लालबागचा राजा 2025: पहले दिन ही भारी चढ़ावा, विदेशी मुद्रा और नोटों की मालाएँ आकर्षण का केंद्र

लालबागचा राजा में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया दान
लालबागचा राजा में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया दान

मुंबई के लालबागचा राजा मंडल में गणेशोत्सव 2025 के पहले दिन दानपात्र खोले गए। चढ़ावे में नकदी, नोटों की मालाएँ और विदेशी मुद्रा मिलीं। गिनती में 80 लोग जुटे।

मुंबई, 28 अगस्त: मुंबई के सबसे लोकप्रिय लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल में इस वर्ष भी श्रद्धालुओं ने जमकर आस्था व्यक्त की। गणेश चतुर्थी 2025 के पहले दिन ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावा दिया गया, जिसकी गिनती गुरुवार से शुरू हुई। मंडल के तीन दानपात्रों में से एक बॉक्स खोला गया और करीब 80 लोगों की टीम गिनती में जुटी हुई है।

  • नोटों की मालाएँ और विदेशी मुद्रा

दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे में केवल भारतीय रुपये ही नहीं, बल्कि अमेरिकी डॉलर सहित कई विदेशी मुद्राएँ भी मिलीं। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नोटों की मालाएँ भी इस बार का विशेष आकर्षण बनीं। यह आस्था का दृश्य दर्शाता है कि भक्त अपने प्रिय लालबागचा राजा के प्रति कितनी गहरी श्रद्धा और विश्वास रखते हैं।

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  • पिछले साल से तुलना

मंडल के कोषाध्यक्ष मंगेश दत्ताराम दलवी ने जानकारी दी कि,“यह पहले दिन के पहले बॉक्स की गिनती है। अब गिनती शुरू हुई है, कुल तीन बॉक्स हैं। पिछले साल पहले दिन की गिनती में हमें लगभग 48 लाख रुपये प्राप्त हुए थे।”

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उत्साह को देखते हुए इस बार चढ़ावा और भी अधिक होने की संभावना है।

  • दान का उपयोग कहाँ होता है?

मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि प्राप्त दान राशि का उपयोग विभिन्न सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों में किया जाता है। इसमें निशुल्क भोजन केंद्र का संचालन,पुस्तकालय सुविधा,गरीब मरीजों की सर्जरी और उपचार हेतु आर्थिक सहायता शामिल हैं।

  • आस्था और सामाजिक सेवा का प्रतीक

लालबागचा राजा सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे देश में गणेश भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। यहाँ दर्शन के लिए लाखों भक्त घंटों लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। कई भक्त मनोकामना पूरी होने की कृतज्ञता में उदार दान करते हैं। यही कारण है कि हर साल मंडल को करोड़ों रुपये का चढ़ावा मिलता है।

पहले दिन की गिनती से ही इस साल रिकॉर्ड दान मिलने के संकेत मिल रहे हैं। लालबागचा राजा को मिलने वाला चढ़ावा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक सेवा और जनकल्याण का भी सशक्त माध्यम है।

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