मुंबई: महाराष्ट्र में दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण, पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए जिला वार्षिक योजना की एक प्रतिशत निधि इस्तेमाल करने तथा उससे जुड़ी कार्यपद्धति को मंजूरी दी गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर की मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे जिला स्तर पर संबंधित कामों के लिए वित्तीय नियोजन का रास्ता स्पष्ट करने की कोशिश है।

सामान्य जिला योजना से उपयोग की व्यवस्था

उपलब्ध कैबिनेट विवरण में जिला वार्षिक योजना के सर्वसाधारण हिस्से की निधि का उल्लेख है। यह प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति के खाते में एक तय रकम भेजने की अलग नकद योजना की घोषणा नहीं है। किस तरह के काम मंजूर होंगे और रकम कैसे जारी होगी, यह लागू कार्यपद्धति तथा विभागीय निर्देशों से तय होगा।

पहले से उठता रहा था निधि का मुद्दा

इस प्रस्ताव पर दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग में पहले से काम चल रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियोजन विभाग ने 10 फरवरी को जिला वार्षिक योजना के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए एक प्रतिशत निधि रखने का निर्णय किया था। अब मंत्रिमंडल ने उपयोग और कार्यपद्धति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

जिले में असर कैसे स्पष्ट होगा

दिव्यांग नागरिकों के लिए असली महत्व इस बात का होगा कि जिला स्तर पर किन जरूरतों को प्राथमिकता मिलती है और मंजूर काम समय पर पूरे होते हैं। निधि का प्रावधान अपने-आप हर व्यक्ति को एक समान लाभ की पात्रता नहीं देता। संबंधित सरकारी आदेश, स्वीकृत काम और स्थानीय विभाग की सूचना देखना जरूरी होगा।

नागरिक या संगठन अपनी जरूरत का प्रस्ताव रखते समय संबंधित जिला कार्यालय से लागू प्रक्रिया पूछ सकते हैं। उपलब्ध निर्णय में किसी निजी एजेंट को नियुक्त करने, शुल्क जमा करने या नए अनौपचारिक पोर्टल पर आवेदन करने का उल्लेख नहीं है।

अगले आदेशों पर रहेगी नजर

अब कार्यपद्धति के अमल, जिला स्तर के नियोजन और खर्च की जवाबदेही पर ध्यान रहेगा। कैबिनेट की मंजूरी और किसी खास लाभार्थी या काम की अंतिम स्वीकृति अलग चरण हैं। आगे संबंधित विभाग की अधिसूचना से विस्तृत शर्तें स्पष्ट होंगी।