ठाणे: आदिवासी समुदाय की मांगों को लेकर भिवंडी से मंत्रालय की ओर निकला श्रमजीवी संगठन का मोर्चा सरकारी कदमों और आश्वासन के बाद वापस लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से प्रतिनिधिमंडल की बातचीत और बाद में खारेगांव में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से निर्णयों की जानकारी दिए जाने के बाद यह फैसला हुआ।

किन मांगों के लिए निकले थे लोग

संविधान हक्क संघर्ष मोर्चे में शिक्षा, लंबित वन अधिकार दावे, आदिवासी पाड़ों में पीने का पानी, पुनर्वास और आधार पंजीकरण जैसे मुद्दे उठे थे। संगठन के संस्थापक विवेक पंडित की अगुवाई में मंगलवार को निकले आंदोलन में ठाणे के साथ पालघर, रायगड और नाशिक के लोग शामिल हुए।

सरकार ने क्या कहा

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और मांगों पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। 18 वर्ष तक के आदिवासी विद्यार्थियों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के प्रस्ताव पर जांच के बाद निर्णय लेने की बात कही गई है। इसे पूरे प्रस्ताव की अंतिम मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए।

मंगलवार देर रात खारेगांव टोल प्लाजा पर पहुंचे एकनाथ शिंदे ने सरकारी निर्णयों की जानकारी दी और उनकी प्रतियां पंडित को सौंपीं। इसके बाद आंदोलन वापस लेने का निर्णय हुआ। आगे इन फैसलों का विभागवार अमल और संबंधित लोगों तक लाभ पहुंचना महत्वपूर्ण होगा।

मोर्चे का फैसला और ट्रैफिक आदेश अलग

इस मोर्चे के लिए ठाणे क्षेत्र में 27–28 अक्टूबर के भारी वाहनों से जुड़े प्रतिबंध पहले घोषित हुए थे। आंदोलन वापस लिए जाने से हर पुराना ट्रैफिक आदेश अपने-आप रद्द मान लेना सही नहीं होगा। वाहन चालक उसी दिन की पुलिस सूचना देखकर रास्ता तय करें।

मांगों पर बातचीत का अगला आकलन जमीन पर हुए काम से होगा। वन अधिकार दावों का निपटारा, पानी और विद्यार्थियों की सुविधाओं से जुड़े अगले आदेश संबंधित विभागों से स्पष्ट होंगे।