महाराष्ट्र में सूखे के बीच पशुपालकों के लिए चारे की व्यवस्था पर नया नियोजन सामने आया है। पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने 30 अक्टूबर को बताया कि चारा उत्पादन, उपलब्ध चारे को सुरक्षित रखने और वैकल्पिक स्रोत विकसित करने के लिए जिला वार्षिक योजना से कम से कम पांच प्रतिशत निधि उपलब्ध कराई जाएगी।
हर जगह छावनी शुरू होने की घोषणा नहीं
स्थानीय स्थिति के आधार पर पालकमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति चारा छावनी शुरू करने का निर्णय लेगी। पशुधन की संख्या, पानी और चारे की उपलब्धता देखकर जरूरत तय होगी। इसलिए इस निर्णय का मतलब सभी जिलों में छावनियां तत्काल खुल जाना नहीं है।
उत्पादन बढ़ाने और चारा बैंक पर जोर
कम पानी में तैयार होने वाली और कई बार काटी जा सकने वाली चारा फसलों को बढ़ावा देने की योजना है। कृषि विश्वविद्यालयों, बीज गुणन केंद्रों और सरकारी संस्थाओं की जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा। महाबीज तथा दूसरे उत्पादकों के जरिए बीज उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
जिलों में चारा बैंक बनाने में किसान उत्पादक संस्थाओं, कंपनियों और स्वयंसेवी संगठनों की मदद ली जाएगी। हाइड्रोपोनिक्स और अजोला जैसे वैकल्पिक तरीकों को भी बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।
खरीद के लिए आधार दर
सूखे चारे की अधिकतम आधार खरीद कीमत 12 रुपये प्रति किलो और मुरघास की 8 रुपये प्रति किलो तय होने की जानकारी दी गई है। इसमें परिवहन खर्च शामिल नहीं है। इसे हर पशुपालक को इसी कीमत पर मिलने वाली खुली बाजार की बिक्री दर या नकद सहायता की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
हाजिरी और खर्च का डिजिटल रिकॉर्ड
छावनियों के लिए ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी। पशु पंजीकरण, रोज की हाजिरी, चारे और पानी का वितरण, पशु चिकित्सा तथा भुगतान का रिकॉर्ड उसमें रखने की योजना है। बायोमेट्रिक या QR हाजिरी, भारत पशुधन प्रणाली से सत्यापन और CCTV का भी प्रावधान बताया गया है।
जिला स्तर पर योजना के अमल, उपलब्ध स्थान और प्रवेश की व्यवस्था की अलग सूचना जरूरी होगी। फिलहाल यह चारे की कमी से निपटने की योजना है; लाभ मिलने की व्यक्तिगत तारीख घोषित नहीं है।




