मुंबई: महाराष्ट्र में सूखे से काम और आमदनी पर असर झेल रहे भूमिहीन खेत मजदूरों के लिए अलग राहत की मांग बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची है। स्वाभिमानी मजदूर संगठन की जनहित याचिका में तत्काल मदद और सामाजिक सुरक्षा के निर्देश मांगे गए हैं। मामला 4 नवंबर को सुनवाई के लिए रखा गया है। अभी राहत मंजूर होने का आदेश नहीं हुआ है।
जमीन के रिकॉर्ड पर आधारित मदद से छूटने का तर्क
याचिकाकर्ता का कहना है कि जमीन का लगान माफ करने और फसल कर्ज के पुनर्गठन जैसी राहत जमीन या औपचारिक बैंक कर्ज से जुड़ी होती है। ऐसे में खेतों में मजदूरी करने वाले कई परिवार काम और आमदनी गंवाने के बावजूद बराबर सहायता नहीं पा सकते। यह याचिका का तर्क है; अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं।
काम, भोजन और पानी की मांग
संगठन ने रोजगार से जुड़े लाभ और बेरोजगारी भत्ते की अदायगी, न्यूनतम मजदूरी से जुड़ी नकद सहायता, मुफ्त अनाज व भोजन, सुरक्षित पीने के पानी और पशुओं के चारे जैसी मदद मांगी है। इसमें ग्रामीण परिवारों के निजी और माइक्रोफाइनेंस कर्ज तथा वसूली की परेशानी का मुद्दा भी उठाया गया है।
याचिका में लंबी अवधि का सूखा निवारण कार्यक्रम और उसकी प्रगति की नियमित निगरानी की मांग भी की गई है। इन मांगों पर सरकार और संबंधित विभागों का पक्ष तथा अदालत की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
अदालत ने मौजूदा उपायों का उल्लेख किया
मामला तत्काल सूचीबद्ध कराने के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार के पहले से घोषित राहत उपायों का उल्लेख किया। याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि भूमिहीन श्रमिकों और कमजोर आय वर्ग के लिए अलग समस्याएं बनी हुई हैं।
मामले को संबंधित याचिका के साथ 4 नवंबर को रखने की जानकारी है। सुनवाई तय होने को नकद भुगतान, नई पात्रता या किसी राहत योजना की शुरुआत न समझें।
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