Vasai- Virar: महाराष्ट्र विधानपरिषद की पांच सीटों के चुनावी नतीजों में महाविकास आघाडी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि सत्तारूढ़ महायुती को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। इन नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा नागपुर ग्रेजुएट सीट की हो रही है, जहां बीजेपी को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे ग्रेजुएट सीट पर शरद पवार की एनसीपी ने जीत हासिल की है। चुनाव परिणामों के साथ ही महायुती के भीतर मतभेद भी सामने आने लगे हैं। विशेष रूप से पुणे की दोनों सीटों पर बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच विवाद गहरा गया है।
नागपुर में फिर टूटा बीजेपी का किला, अभिजित वंजारी लगातार दूसरी बार विजयी
नागपुर ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम बीजेपी के लिए खास मायने रखता है। लंबे समय तक पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रभाव वाला यह क्षेत्र एक बार फिर कांग्रेस के खाते में गया है। कांग्रेस उम्मीदवार अभिजित वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से पराजित कर लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
इस सीट पर शुरुआत में मुकाबला दिलचस्प हो गया था। बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले के अलावा पार्टी के बागी अनिल सोले, कांग्रेस के अभिजित वंजारी और निर्दलीय नितेश कराले ने नामांकन दाखिल किया था। स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं अनिल सोले के घर पहुंचे और उन्हें मनाने में सफल रहे। इसके बाद मुख्य मुकाबला कोहले, वंजारी और कराले के बीच सिमट गया।
मतगणना में पहली और दूसरी पसंद के वोटों को मिलाकर अभिजित वंजारी को कुल 67,231 मत मिले, जबकि सुधाकर कोहले को 63,960 वोट प्राप्त हुए।
नागपुर ग्रेजुएट सीट का राजनीतिक इतिहास बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण रहा है। करीब पांच दशकों तक यहां पार्टी का दबदबा बना रहा। वर्ष 1978 से 1988 के बीच देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधरराव फडणवीस इस क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। इसके बाद 1990 से लगातार 24 वर्षों तक नितिन गडकरी ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। उनके बाद अनिल सोले ने जीत हासिल की।
हालांकि, 2020 में कांग्रेस के अभिजित वंजारी ने बीजेपी की जीत का यह लंबा सिलसिला समाप्त कर दिया था। अब 2026 में उन्होंने एक बार फिर जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी है। राज्य की सत्ता में होने और मुख्यमंत्री फडणवीस के सीधे हस्तक्षेप के बावजूद बीजेपी का यह सीट वापस हासिल नहीं कर पाना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
अमरावती शिक्षक सीट पर शिवसेना ने बचाया कब्जा, बगावत बेअसर
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महायुती की ओर से एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने जीत दर्ज की। सीट बंटवारे में यह क्षेत्र शिवसेना के हिस्से आया था और पार्टी ने 2020 के विजेता किरण सरनाईक पर दोबारा भरोसा जताया।
हालांकि, यहां भी महायुती के भीतर बगावत देखने को मिली। शिवसेना के श्रीकांत देशपांडे ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया।
दूसरी ओर, महाविकास आघाडी के सीट बंटवारे में यह सीट कांग्रेस को मिली थी। कांग्रेस ने देशोन्नती मीडिया समूह के प्रकाश पोहरे की बहू अदिती पोहरे को उम्मीदवार बनाया। चुनाव में कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन परिणाम अपेक्षाकृत एकतरफा रहा।
किरण सरनाईक को 16,663 वोट मिले, जबकि अदिती पोहरे को 8,636 मत प्राप्त हुए। इस तरह पार्टी के भीतर हुई बगावत का शिवसेना की जीत पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
संभाजीनगर में शरद पवार की एनसीपी की बड़ी जीत, तीन बार के विजेता सतीश चव्हाण पराजित
छत्रपति संभाजीनगर ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र में शरद पवार की एनसीपी ने अजित पवार की एनसीपी को पराजित किया। महायुती के सीट बंटवारे में यह सीट अजित पवार की पार्टी को मिली थी, जिसने लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके सतीश चव्हाण को फिर उम्मीदवार बनाया।
उनके मुकाबले शरद पवार की एनसीपी ने प्रतापसिंह पाटील को चुनाव मैदान में उतारा। युवा यूट्यूबर रविराज साबळे की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया था।
मतगणना में प्रतापसिंह पाटील को 85,876 वोट मिले, जबकि सतीश चव्हाण 67,752 मत हासिल कर सके। पाटील ने 18,124 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
इस परिणाम के साथ संभाजीनगर की वह सीट, जिस पर सतीश चव्हाण लगातार तीन बार जीत हासिल कर चुके थे, शरद पवार की एनसीपी के खाते में चली गई।
पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी की जीत, लेकिन शिंदे की शिवसेना के समर्थन से विवाद
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी ने 30 वर्षीय कौस्तुभ गावडे को उम्मीदवार बनाया था। गावडे, विवेकानंद शिक्षण प्रसारक मंडल की स्थापना करने वाले बापूजी सालुंके के पोते हैं। चुनाव में उन्हें इस शैक्षणिक संस्था के व्यापक नेटवर्क का समर्थन प्राप्त था।
महाविकास आघाडी की ओर से कांग्रेस ने जयंत आसगावकर को मैदान में उतारा था। लेकिन इस सीट पर विवाद उस समय शुरू हुआ, जब महायुती की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन देने का फैसला किया।
शिवसेना के इस कदम से बीजेपी नेताओं में नाराजगी पैदा हुई। हालांकि, चुनाव परिणाम पर इसका असर नहीं पड़ा और कौस्तुभ गावडे ने बड़े अंतर से जीत हासिल की।
गावडे को 23,117 वोट मिले, जबकि सचिन सानप को 13,347 मत प्राप्त हुए। बीजेपी उम्मीदवार की जीत के बावजूद शिवसेना द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने का मुद्दा दोनों सहयोगी दलों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।
पुणे ग्रेजुएट सीट पर बीजेपी की हार से महायुती में खींचतान तेज
पुणे ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव महायुती के भीतर बढ़ते मतभेदों के कारण चर्चा में रहा। बीजेपी ने पुढारी मीडिया समूह के मालिक प्रतापराव जाधव की बहू स्मिता जाधव को उम्मीदवार बनाया था। उनके मुकाबले शरद पवार की एनसीपी ने हर्षदा जाधव को मैदान में उतारा।
हर्षदा जाधव के पिता भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके हैं और शरद पवार के करीबी माने जाते रहे हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान महायुती के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। शिंदे की शिवसेना के नेता रविंद्र धंगेकर ने बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ सार्वजनिक रुख अपनाया। उन्होंने पुढारी मीडिया समूह की चुनाव संबंधी गतिविधियों पर आपत्ति जताई और सोशल मीडिया के माध्यम से स्मिता जाधव को हराने की अपील तक कर दी।
चुनाव परिणाम में हर्षदा जाधव को 1,13,840 वोट मिले, जबकि बीजेपी की स्मिता जाधव को 1,03,912 मत प्राप्त हुए। इस तरह हर्षदा जाधव ने 9,928 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
इस हार के बाद बीजेपी नेताओं की नाराजगी सामने आई है। पार्टी के नेता सुबह से ही शिंदे की शिवसेना से उसके नेताओं की भूमिका को लेकर जवाब मांग रहे हैं।
चुनावी नतीजों के बाद महायुती के भीतर नए सवाल
पांच सीटों के इन चुनावों में महाविकास आघाडी ने तीन और महायुती ने दो सीटें जीती हैं। कांग्रेस ने नागपुर ग्रेजुएट सीट बरकरार रखी, जबकि शरद पवार की एनसीपी ने संभाजीनगर और पुणे ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। दूसरी ओर, महायुती को अमरावती शिक्षक और पुणे शिक्षक सीट पर सफलता मिली।
इन नतीजों में नागपुर की हार और पुणे की दोनों सीटों पर सहयोगी दलों के बीच सामने आए मतभेद विशेष रूप से चर्चा में हैं। नागपुर में बीजेपी लगातार दूसरी बार अपनी पुरानी सीट वापस हासिल करने में विफल रही, जबकि पुणे में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेताओं की चुनावी भूमिका को लेकर बीजेपी के भीतर असंतोष बना हुआ है।
चुनावी मुकाबला समाप्त हो चुका है, लेकिन पुणे में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के बीच शुरू हुआ विवाद महायुती के आंतरिक समीकरणों के लिए एक नया सवाल बनकर सामने आया है।
—–समाप्त—–




