पालघर जिले के वरोर में शुक्रवार 30 अक्टूबर को वाढवण बंदर और दूसरे प्रस्तावित प्रकल्पों के विरोध में सभा हुई। स्थानीय लोगों, मछुआरों, आदिवासी समूहों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जमीन, पारंपरिक कामकाज और आजीविका से जुड़े सवाल उठाए।
सभा में क्या मांग उठी?
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ सहित विपक्षी नेताओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने विरोध को समर्थन दिया। वक्ताओं ने विस्थापन, मछली व्यवसाय और पर्यावरण पर असर की आशंकाएं रखीं। ये प्रदर्शनकारियों की चिंताएं और मांगें हैं; इन्हें स्वतंत्र पर्यावरणीय निष्कर्ष नहीं माना गया है।
सभा का विरोध वाढवण तक सीमित नहीं था। साफाळे के पास प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियों और मुरबे बंदर से जुड़े मुद्दे भी उठे। आयोजकों की भीड़ संबंधी अपेक्षा और वास्तव में जुटी संख्या अलग बातें हैं, इसलिए सभा से पहले की अनुमानित संख्या को उपस्थिति का अंतिम आँकड़ा नहीं बताया गया है।
मुआवजे के मामलों के लिए अलग शिविर
इस बीच प्रकाशित प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, वाढवण बंदर से प्रभावित जमीन मालिकों के लंबित भूमि-अधिग्रहण और मुआवजा मामलों के लिए 2 नवंबर को विशेष शिविर रखा गया है। समय सुबह 11 बजे और स्थान पालघर कलेक्टर कार्यालय परिसर का लोकशाहीर आत्माराम पाटील जिला नियोजन सभागृह बताया गया है।
शिविर की यह जानकारी सभा से अलग प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसका अर्थ सभी आपत्तियां सुलझ जाना, हर जमीन मालिक को मुआवजा स्वीकृत होना या उसी दिन भुगतान की गारंटी नहीं है। जाने से पहले संबंधित कार्यालय से समय और आवश्यक कागजात की पुष्टि करना उचित होगा।
पहले संवाद की कोशिश भी हुई थी
सभा से पहले प्रशासन की बैठक में विरोधी संगठनों के शामिल न होने की खबर आई थी। उस पृष्ठभूमि की MCS रिपोर्ट नीचे है। नया घटनाक्रम सभा के वास्तव में होने और लंबित मामलों के शिविर की जानकारी से संबंधित है।
सभा से पहले प्रशासन की बैठक और संगठनों के बहिष्कार की रिपोर्ट




