महाराष्ट्र में डिजिटल क्रॉप सर्वे ऐप की समस्या के कारण खरीफ की फसल नोंदणी पूरी नहीं कर पा रहे किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया की दिक्कत दूर करने के प्रयास के बाद भी नोंदणी संभव न हो, तो तलाठी स्तर पर ई-फेरफार प्रणाली के जरिए फसल पाहणी और नोंदणी की जा सकेगी।

महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देशों के बाद 6 नवंबर को इस संबंध में शासन निर्णय जारी होने की जानकारी सामने आई है। यह विकल्प चालू खरीफ हंगाम के उन मामलों के लिए है जहां तकनीकी या भौगोलिक बाधा से ऑनलाइन काम अटका है। सभी किसानों के लिए मोबाइल ऐप बंद करने की घोषणा नहीं की गई है।

किस तरह की परेशानियां सामने आईं

ऐप में किसान के खेत पर मौजूद होने के बावजूद खेत की सीमा से 20 मीटर से अधिक दूरी दिखाई देने जैसी शिकायतें मिली हैं। कहीं नक्शे आपस में बदल जाते हैं, कहीं पूरे गांव का नक्शा नहीं मिलता। कुछ मामलों में किसान का नाम या जमीन के खाते की जानकारी ऐप में उपलब्ध नहीं है।

ऐसी त्रुटियों से खेत में उगी वास्तविक फसल का विवरण दर्ज नहीं हो पाता। नया विकल्प उसी लंबित प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए दिया गया है। इससे लगभग 70 लाख किसानों को राहत मिलने का अनुमान बताया गया है; यह पूरी हो चुकी ऑफलाइन नोंदणी की संख्या नहीं है।

गांव स्तर पर किससे संपर्क करें

किसान अपने गांव के तलाठी या ग्राम महसूल अधिकारी को ऑनलाइन प्रक्रिया की समस्या बताकर लागू वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी लें। जिले की स्थानीय कार्ययोजना और सहायता व्यवस्था के अनुसार प्रक्रिया पूरी होगी। बुलढाणा जिला प्रशासन की पहले जारी सूचना में भी फसल की सही जानकारी दर्ज कराने और गांव स्तर के कर्मचारियों से समन्वय पर जोर दिया गया था।

फसल नोंदणी और राहत मंजूरी अलग प्रक्रियाएं

फसल दर्ज हो जाने का अर्थ अपने-आप किसी खास राहत राशि की मंजूरी या भुगतान नहीं है। महाराष्ट्र में सूखे के पंचनामों और केंद्र को भेजे मदद के प्रस्ताव की अलग प्रक्रिया चल रही है। किसान नोंदणी, नुकसान के आकलन और आर्थिक सहायता को एक ही चरण न समझें। इस नए विकल्प के साथ कोई सार्वभौमिक भुगतान तारीख घोषित नहीं हुई है।