मीरा-भायंदर: पानी की दिक्कत का लंबे समय का हल तलाशने के लिए शहर के पहाड़ी हिस्सों में बारिश का पानी रोकने का प्रस्ताव सामने आया है। ऑल इंडिया सिटिजन्स विजिलन्स कमिटी ने मनपा आयुक्त और ठाणे जिल्हाधिकारी को निवेदन देकर छोटे बांध, यानी लघुबंधारे बनाने की मांग की है। यह मांग 30 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट में दर्ज है।
किन इलाकों और कितने बंधारों का सुझाव?
संगठन ने उत्तन-डोंगरी, घोडबंदर और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पास के पहाड़ी क्षेत्रों का विकल्प सुझाया है। पहले चरण में 10 लघुबंधारे बनाने और नीरी या आईआईटी मुंबई से 60 दिन में सर्वे तथा विस्तृत प्रकल्प रिपोर्ट तैयार कराने की मांग है।
राष्ट्रीय मुख्य महासचिव राजन वासू नायर के निवेदन में नए निर्माणों में वर्षाजल संचयन, जलसंवर्धन के लिए अलग कक्ष और टैंकर खर्च की जानकारी सार्वजनिक करने जैसे सुझाव भी शामिल हैं।
मांग और मंजूर योजना में फर्क
यह नागरिक संगठन का प्रस्ताव है। उपलब्ध जानकारी में मनपा की मंजूरी, तय बजट, काम का आदेश या निर्माण शुरू होने की तारीख सामने नहीं है। इसलिए बताए गए इलाकों में बंधारे बनने का फैसला हो गया है, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
बारिश का पानी रोकने की जरूरत क्यों उठी?
शहर में पानी की उपलब्धता और आपूर्ति के अंतराल का मुद्दा पहले से है। MCS ने अक्टूबर में जारी साप्ताहिक जलापूर्ति व्यवस्था पर भी रिपोर्ट की थी। वह पहले की सूचना है; किसी दिन की कटौती या उसके रद्द होने की ताजा स्थिति अलग से जांचनी होगी।
जल शक्ति मंत्रालय के जल संरक्षण संबंधी दस्तावेजों में छोटे जलमार्ग पर बनाए जाने वाले चेक डैम को बारिश का पानी सहेजने का एक उपाय बताया गया है। राष्ट्रीय जल मिशन की जल संचय जनभागीदारी पहल भी पानी बचाने और भूजल पुनर्भरण में स्थानीय भागीदारी पर जोर देती है।
आगे किस जवाब का इंतजार?
इस स्थानीय मांग पर प्रशासन का जवाब, सर्वे के लिए चुनी जाने वाली जगहें और परियोजना की व्यवहार्यता महत्वपूर्ण होंगी। जलसंचय का प्रस्ताव शहर की रोजमर्रा की नल-आपूर्ति के लिए तत्काल नया समय-सारिणी आदेश नहीं है। निवेदन पर औपचारिक निर्णय के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी।




