पालघर: डहाणू तालुका के गोवणे गांव के सामूहिक वनहक्क दावे को मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। 30 अक्टूबर की स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूर वनक्षेत्र 96 हेक्टेयर है। गांव की ओर से 2016 में शुरू किए गए प्रयासों को करीब दस साल बाद सफलता मिली है।
एक समिति से अगली समिति तक जारी रहा प्रयास
तत्कालीन ग्रामपंचायत समिति ने प्रस्ताव के जरिए प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद मौजूदा ग्रामपंचायत, वनहक्क समिति और ग्रामस्थों ने काम आगे बढ़ाया। मंजूरी से जुड़ी जानकारी के मौके पर उपसरपंच संदीप टोकरे, वनहक्क समिति अध्यक्ष आनंद वायेडा और वन संसाधन समिति अध्यक्ष शैलेश सुमडा सहित ग्रामस्थ मौजूद थे।
ग्रामसभा और जंगल के संरक्षण का संबंध
यह खबर गांव के सामूहिक वनहक्क से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्ट में पारंपरिक अधिकारों की मान्यता और वनसंपदा के संरक्षण-संवर्धन में ग्रामसभा की भूमिका को इसका महत्वपूर्ण पहलू बताया गया है।
पालघर जिला प्रशासन के वनहक्क संबंधी पेज पर सामूहिक अधिकार मिलने के बाद की प्रक्रिया भी बताई गई है। इसमें ग्रामसभा, सामूहिक वनहक्क प्रबंधन समिति, क्षेत्र का सीमांकन और प्रबंधन नियम तैयार करना शामिल है। विकास योजना को ग्रामसभा से मंजूरी दिलाने तथा संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्ताव भेजने का चरण भी दर्ज है।
यह मुद्दा पूरे जिले के लिए क्यों अहम है?
वन अधिकार स्थानीय समुदायों के लंबे समय से उठते मुद्दों में शामिल रहे हैं। MCS की शिक्षा और लंबित वन अधिकार दावों को लेकर आदिवासी मोर्चे की रिपोर्ट में भी इन मांगों का संदर्भ है। गोवणे की मंजूरी एक अलग स्थानीय घटनाक्रम है; दोनों को एक ही प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
जिला प्रशासन के मुताबिक वनहक्क के काम के साथ आजीविका, खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता का संरक्षण और पर्यावरण का संतुलन भी जुड़े हैं। यही वजह है कि क्षेत्र मंजूर होने के बाद उसके प्रबंधन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहती है।
किन विवरणों की पुष्टि बाकी है?
गोवणे के मंजूरी आदेश की प्रति, वनखंडों का पूरा नक्शा और गांव-विशेष की आगे की कार्ययोजना उपलब्ध सामग्री में नहीं मिली है। इसलिए किसी खास निर्माण, आर्थिक लाभ या व्यक्तिगत जमीन आवंटन की घोषणा इस खबर के आधार पर नहीं की जा रही है।




