मुंबई, 8 नवंबर 2026: ऊंची इमारत की ऊपरी मंजिल पर रहने से सड़क के धुएं और धूल से राहत मिलती है—यह सामान्य धारणा मुंबई के एक नए अध्ययन में सवालों के घेरे में आई है। वडाला की चुनिंदा रिहायशी इमारतों में किए गए सेंसर अध्ययन के दौरान ऊपरी मंजिलों पर प्रदूषण का स्तर निचली मंजिलों की तुलना में कुछ अवधियों में 40 प्रतिशत तक अधिक दर्ज किया गया।
मुंबई इकोलॉजिकल रिसर्च एंड एनालिसिस ग्रुप के अध्ययन में फरवरी से मई 2026 के बीच दूसरी से 26वीं मंजिल तक सेंसर लगाए गए थे। उपकरणों ने PM2.5, मोटे धूल कणों और कुछ गैसीय संकेतकों को रिकॉर्ड किया। हवा की दिशा और गति पर भी नजर रखी गई, ताकि अलग-अलग ऊंचाई पर प्रदूषक कैसे चलते हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सके।
मार्च में सबसे बड़ा अंतर दर्ज
अध्ययन के अनुसार मार्च में ऊपरी और निचली मंजिलों के कण प्रदूषण का अनुपात 1.40 तक पहुंचा। सरल शब्दों में, उस अवधि में ऊपरी स्तरों पर प्रदूषण निचले स्तर की तुलना में करीब 40 प्रतिशत अधिक था। शोधकर्ताओं ने कई मंजिलों पर लगातार बढ़ता रुझान दर्ज करने की बात कही है।
यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्यतः वाहन प्रदूषण को सड़क के नजदीक अधिक मानते हुए ऊंची मंजिलों को अपेक्षाकृत साफ समझा जाता है। सेंसर आंकड़े बताते हैं कि शहरी हवा का व्यवहार केवल जमीन से दूरी पर निर्भर नहीं करता।
ऊपर प्रदूषण बढ़ने के संभावित कारण
शोधकर्ताओं ने दूर स्थित औद्योगिक स्रोतों और फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन को एक संभावित कारण माना है। हवा के साथ क्षैतिज दिशा में यात्रा करने वाले प्रदूषक ऊंची इमारतों के ऊपरी हिस्सों तक सीधे पहुंच सकते हैं।
दूसरा संभावित कारण ऊंची इमारतों के समूह के आसपास बनने वाली घूमती वायु धाराएं हैं। टावरों से टकराकर हवा में छोटे भंवर और पुनर्चक्रण की स्थिति बन सकती है, जिससे धुआं और महीन धूल ऊपर के स्तरों पर कुछ समय तक अटके रह सकते हैं। ये संभावित व्याख्याएं हैं; हर इमारत में समान स्थिति होगी, ऐसा अध्ययन नहीं कहता।
पूरे मुंबई पर निष्कर्ष लागू करने से पहले सावधानी
अध्ययन वडाला की चुनिंदा रिहायशी इमारतों और फरवरी-मई की अवधि तक सीमित था। समुद्र से दूरी, आसपास के उद्योग, सड़क यातायात, इमारतों की दिशा, मौसम और हवा की गति के कारण दूसरे इलाकों में परिणाम अलग हो सकते हैं। इसलिए 40 प्रतिशत के आंकड़े को हर ऊंची इमारत के लिए स्थायी नियम नहीं माना जाना चाहिए।
फिर भी अध्ययन यह संकेत देता है कि एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग केवल सड़क स्तर पर करने से ऊंची इमारतों के निवासियों का वास्तविक जोखिम पूरी तरह सामने नहीं आ सकता। शहर में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग और जमीनी हवा के अंतर पर MCS की पड़ताल भी मॉनिटरिंग नेटवर्क के विस्तार की जरूरत रेखांकित कर चुकी है।
निवासी क्या समझें
ऊंची मंजिल पर रहने वालों को घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन साफ हवा का अनुमान केवल मंजिल देखकर नहीं लगाना चाहिए। स्थानीय AQI, घर के भीतर धूल के स्रोत, वेंटिलेशन और फिल्टर की सफाई जैसे कारक भी महत्वपूर्ण हैं। सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों को खराब वायु गुणवत्ता के दिनों में डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का पालन करना चाहिए।
इस अध्ययन की विस्तृत पद्धति, अलग-अलग मौसमों के आंकड़े और दूसरे मुंबई क्षेत्रों में समान परीक्षण उपलब्ध होने पर निष्कर्ष अधिक मजबूत होंगे। फिलहाल नतीजे ऊंचाई के अनुसार प्रदूषण मापने के लिए व्यापक और स्वतंत्र अध्ययन की जरूरत दिखाते हैं।




