मुंबई: शहर के पश्चिमी उपनगरों में प्रस्तावित कोस्टल रोड नॉर्थ परियोजना के मालाड–कांदिवली टनल हिस्से ने एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने चेन्नई में तैयार हो रही दो विशाल टनल बोरिंग मशीनों का फैक्ट्री एक्सेप्टेंस टेस्ट पूरा कर लिया है। मशीनों के हिस्से जनवरी 2027 तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है और पहली मशीन से खुदाई मई 2027 में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
15.6 मीटर व्यास वाली ये मशीनें देश में इस्तेमाल होने वाली सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में शामिल होंगी। इनके जरिए मालाड के माइंडस्पेस से कांदिवली के चारकोप तक लगभग 3.9 किलोमीटर लंबी दो समानांतर सुरंगें बनाई जानी हैं। यह हिस्सा जमीन से करीब 40 मीटर नीचे होगा और वर्सोवा से दहिसर तक बन रहे 22.93 किलोमीटर लंबे कोस्टल रोड नॉर्थ कॉरिडोर का प्रमुख भाग है।
जनवरी में आएंगे हिस्से, चारकोप में होगी असेंबली
टनल बोरिंग मशीन को एक टुकड़े में मुंबई लाना संभव नहीं होगा। फैक्ट्री टेस्ट के बाद दोनों मशीनों को अलग-अलग हिस्सों में खोलकर सड़क या समुद्री मार्ग से शहर तक पहुंचाया जाएगा। चारकोप के लॉन्चिंग शाफ्ट पर इन हिस्सों को दोबारा जोड़ा जाएगा। असेंबली, सिस्टम टेस्ट और सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद मशीन को जमीन के भीतर उतारा जाएगा।
BMC ने फिलहाल पहली TBM से मई 2027 में टनलिंग शुरू करने का लक्ष्य रखा है। दूसरी मशीन अलग समानांतर सुरंग पर काम करेगी। फैक्ट्री एक्सेप्टेंस टेस्ट में मशीन के कटर हेड, ड्राइव सिस्टम, दबाव नियंत्रण, स्लरी संचालन और सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाती है। यह टेस्ट पूरा होना मशीन की डिलीवरी से पहले जरूरी तकनीकी कदम माना जाता है।
सामान्य TBM से अलग क्यों हैं ये मशीनें?
माइंडस्पेस–चारकोप का प्रस्तावित मार्ग खाड़ी, मैंग्रोव और पानी वाली अस्थिर मिट्टी के नजदीक से गुजरता है। ऐसे क्षेत्र में जमीन धंसने या भूमिगत पानी के प्रवेश का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से परियोजना के लिए मिक्सशील्ड स्लरी TBM चुनी गई हैं। ये मशीनें खुदाई करते समय सामने की मिट्टी पर नियंत्रित दबाव बनाए रखती हैं और निकली मिट्टी को पानी के साथ मिलाकर पाइपलाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजती हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक मशीन की स्लरी संभालने की क्षमता लगभग 2,900 घनमीटर प्रति घंटा होगी। मुंबई के कई दूसरे टनल प्रोजेक्ट में कठोर चट्टान के लिए अर्थ प्रेशर बैलेंस मशीनों का उपयोग हुआ है, लेकिन इस हिस्से की जलयुक्त मिट्टी के कारण अलग तकनीक जरूरी बताई गई है।
₹16,621 करोड़ की कोस्टल रोड नॉर्थ परियोजना
वर्सोवा से दहिसर तक प्रस्तावित कोस्टल रोड नॉर्थ की अनुमानित लागत ₹16,621 करोड़ है। करीब 22.93 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में एलिवेटेड सड़कें, पुल और भूमिगत टनल शामिल हैं। परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी उपनगरों में उत्तर–दक्षिण यात्रा के लिए वैकल्पिक तेज मार्ग उपलब्ध कराना है।
मालाड–कांदिवली की दोनों सुरंगों पर अलग-अलग पैकेज में काम होगा। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, एक दिशा की सुरंग की लागत करीब ₹2,911 करोड़ और दूसरी की करीब ₹2,910 करोड़ बताई गई है। टनल का निर्माण मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड कर रही है, जबकि TBM जर्मनी की हेरेंक्नेख्ट कंपनी तैयार कर रही है।
यात्रियों को कब मिलेगा फायदा?
मशीनों का मुंबई पहुंचना और खुदाई शुरू होना परियोजना की प्रगति के महत्वपूर्ण संकेत होंगे, लेकिन इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि रास्ता जल्द यातायात के लिए खुल जाएगा। टनलिंग के बाद संरचनात्मक लाइनिंग, सड़क, वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, निकासी मार्ग और कई चरणों के परीक्षण बाकी रहेंगे। अंतिम समयसीमा कार्य की वास्तविक प्रगति और मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
मुंबई में एक साथ कई बड़े सड़क और टनल प्रोजेक्ट चल रहे हैं। मेट्रो सिटी समाचार ने इससे पहले ऑरेंज गेट–मरीन ड्राइव टनल परियोजना और BMC के ₹8,614 करोड़ के सड़क कंक्रीटीकरण प्लान पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।
अब निगाह जनवरी 2027 में मशीनों के हिस्से पहुंचने, चारकोप लॉन्चिंग शाफ्ट की तैयारी और मई में प्रस्तावित खुदाई पर रहेगी। इन तीन चरणों की समय पर प्रगति ही तय करेगी कि मालाड–कांदिवली टनल वास्तविक निर्माण गति कब पकड़ती है।




