मुंबई | मेट्रो सिटी समाचार: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में गुरुवार को मुंबई की विशेष मकोका अदालत में सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया। अदालत में मौजूद सभी 11 आरोपियों से जज ने पूछा कि क्या उन्हें मराठी आती है? आरोपियों ने जवाब दिया कि उन्हें मराठी नहीं आती। इस पर जज ने हिंदी में कहा, “आप लोग महाराष्ट्र में थे और मराठी नहीं आती…”

अदालत में हुई इस बातचीत के अलावा सुनवाई के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पेश कीं। पुलिस ने दावा किया कि गिरफ्तार आरोपी एक संगठित टीम के रूप में काम कर रहे थे और उनके बीच हुई वॉइस चैट सहित कई डिजिटल सबूत जांच में मिले हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष मकोका अदालत ने सभी 11 आरोपियों को 6 नवंबर 2026 तक मुंबई क्राइम ब्रांच की पुलिस कस्टडी में भेज दिया।

कोर्ट में जज और आरोपियों के बीच मराठी को लेकर बातचीत

सुनवाई के दौरान जज ने आरोपियों को पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। इसी दौरान जज ने उनसे पूछा, “आप लोगों को मराठी आती है क्या?”

आरोपियों ने जवाब दिया, “हमें मराठी नहीं आती।”

इसके बाद जज ने हिंदी में टिप्पणी की, “आप लोग महाराष्ट्र में थे और मराठी नहीं आती…”

सुनवाई के दौरान हुई यह बातचीत इसलिए भी चर्चा का विषय बनी क्योंकि अदालत में आरोपियों की पुलिस कस्टडी और जांच में सहयोग को लेकर बहस चल रही थी।

क्राइम ब्रांच का दावा—एक टीम की तरह काम कर रहे थे सभी आरोपी

मुंबई क्राइम ब्रांच ने अदालत में आरोपियों की 10 दिनों की पुलिस कस्टडी की मांग की।

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि अब तक की जांच में डिजिटल सबूत और आरोपियों के बीच हुई वॉइस चैट बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक संगठित टीम की तरह काम कर रहे थे।

क्राइम ब्रांच ने दलील दी कि आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ के साथ उन्हें एक-दूसरे के सामने बैठाकर सवाल करना भी जरूरी है, ताकि उनके बयानों और डिजिटल सबूतों के बीच सामने आ रही जानकारियों की पुष्टि की जा सके।

पुलिस यह भी पता लगाना चाहती है कि पूरी वारदात की योजना किसने बनाई, किसने इसे अंजाम दिया और पर्दे के पीछे से निर्देश देने वाला मुख्य व्यक्ति कौन था।

फरार अनिल पंडित को पुलिस ने बताया गैंग लीडर

क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी मकोका (MCOCA) की धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में अनिल पंडित मुख्य गैंग लीडर है, जो फिलहाल फरार है।

जांच एजेंसी का दावा है कि उसी के निर्देश पर फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया गया।

हालांकि, ये पुलिस के आरोप हैं और अदालत में इनकी अंतिम न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

फायरिंग में इस्तेमाल हथियार कहां से आए? विदेशी हथियार की भी जांच

मुंबई क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि जांच में एक महत्वपूर्ण सवाल हथियारों की सप्लाई से जुड़ा है।

पुलिस के मुताबिक, वारदात में इस्तेमाल हथियारों के स्रोत का पता लगाना जरूरी है। इनमें से एक हथियार विदेशी होने की बात भी सामने आई है।

जांच एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि हथियार किसने उपलब्ध कराए, वे आरोपियों तक कैसे पहुंचे और मुंबई में वारदात को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर किसने मदद की।

पुलिस ने इन सवालों के जवाब हासिल करने के लिए आरोपियों की अतिरिक्त कस्टडी जरूरी बताई।

Signal जैसे ऐप्स से संपर्क करते थे आरोपी!

क्राइम ब्रांच ने अदालत में दावा किया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने और आपसी संपर्क बनाए रखने के लिए Signal जैसे विदेशी मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बीच हुई वॉइस चैट और अन्य डिजिटल सबूत मिले हैं।

इसी आधार पर क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के वॉइस सैंपल रिकॉर्ड करने और बरामद डिजिटल सबूतों को सामने रखकर पूछताछ करने की अनुमति मांगी।

जांच एजेंसी के अनुसार, डिजिटल बातचीत से यह समझने में मदद मिल सकती है कि वारदात से पहले और बाद में आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था।

बचाव पक्ष ने कहा—हथियार बरामद हो चुके, अब पुलिस कस्टडी क्यों?

क्राइम ब्रांच की कस्टडी की मांग का आरोपियों के वकीलों ने विरोध किया।

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पुलिस पहले ही हथियार बरामद कर चुकी है और मामले में महत्वपूर्ण बरामदगी हो चुकी है।

वकीलों ने कहा कि आरोपियों के बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी जांच एजेंसी हासिल कर सकती है। इसके लिए आरोपियों को दोबारा पुलिस कस्टडी में रखना जरूरी नहीं है।

बचाव पक्ष ने पूर्व ट्रांजिट रिमांड से संबंधित कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया और सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की।

आरोपी समीर की एक ही किडनी कर रही काम, कोर्ट में पेश हुई मेडिकल रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान आरोपी नंबर 9 समीर की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया।

बचाव पक्ष की ओर से बताया गया कि समीर की केवल एक किडनी काम कर रही है।

इस संबंध में जरूरी मेडिकल रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गईं।

बचाव पक्ष ने आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखने की बात कही।

कोर्ट ने कहा—अपराध की जड़ों तक पहुंचना जरूरी

पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद विशेष मकोका अदालत ने माना कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों की पुलिस कस्टडी आवश्यक है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा:

“The Police Custody is required to go to the roots of crime and verify the information collected so far. It is necessary to ascertain who were the conspirator, executor and the master mind behind the crime.”

अर्थात, अपराध की जड़ों तक पहुंचने और अब तक जुटाई गई जानकारियों की पुष्टि करने के लिए पुलिस कस्टडी जरूरी है। यह पता लगाना आवश्यक है कि अपराध की साजिश किसने रची, उसे अंजाम किसने दिया और उसका मास्टरमाइंड कौन था।

अदालत ने सभी 11 आरोपियों को 6 नवंबर 2026 तक क्राइम ब्रांच की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।

जज ने आरोपियों को जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया।

अब क्राइम ब्रांच के सामने कई बड़े सवाल

इस मामले में पुलिस की आगे की जांच मुख्य रूप से फरार बताए जा रहे अनिल पंडित की भूमिका, हथियारों की सप्लाई, डिजिटल बातचीत और स्थानीय स्तर पर आरोपियों की मदद करने वाले लोगों की पहचान पर केंद्रित रहेगी।

क्राइम ब्रांच यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस कथित आपराधिक नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था।

फिलहाल सभी 11 आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं। मामले की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

मेट्रो सिटी समाचार | मुंबई क्राइम रिपोर्ट