पालघर: वाढवण बंदर के विरोध में 30 अक्टूबर को प्रस्तावित बड़े मोर्चे से पहले प्रशासन और विरोधी संगठनों के बीच बातचीत नहीं हो सकी। कलेक्टर कार्यालय में बुलाई गई समीक्षा बैठक में विरोधी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। प्रशासन ने बातचीत का रास्ता खुला रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
बैठक में नहीं पहुंचे संगठनों के प्रतिनिधि
जिला प्रशासन ने बंदर परियोजना का विरोध कर रहे संगठनों से चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी। निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद उनके पदाधिकारी नहीं पहुंचे। बैठक में MIDC, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पुलिस और अन्य विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने संबंधित संगठनों की बात सुनने और आधिकारिक माध्यम से चर्चा करने की तैयारी जताई है। विरोधी पक्ष की ओर से बैठक में शामिल नहीं होने की अलग विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है।
मोर्चे की औपचारिक सूचना पर प्रशासन का पक्ष
प्रशासन के मुताबिक, प्रस्तावित मोर्चे के बारे में औपचारिक लिखित सूचना उसे नहीं मिली थी। अधिकारियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्टर और बैनरों से इसकी जानकारी हुई। यह प्रशासन का पक्ष है; इसे आयोजकों की प्रतिक्रिया के बिना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
प्रतिबंधों का सही दायरा जानना जरूरी
कानून-व्यवस्था के लिए BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस ने शांति भंग करने, रास्ता रोकने या तोड़फोड़ की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी दी है। मूल आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरे जिले में एक जैसे प्रतिबंध या सभी आवाजाही बंद होने का दावा नहीं किया जा रहा है। नागरिकों को अपने इलाके के लिए जारी पुलिस और जिला प्रशासन की ताजा सूचना देखनी चाहिए।
फिलहाल अहम बात यह है कि 30 अक्टूबर का कार्यक्रम प्रस्तावित है। बैठक में बहिष्कार के बाद प्रशासन ने संवाद की पेशकश जारी रखी है।




