वसई-विरार: शहर में कचरा निस्तारण की गंभीर होती समस्या के बीच वसई-विरार महानगरपालिका ने अब गोवा के वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल का अध्ययन करने की पहल की है। शहर में जमा लाखों टन कचरे के निस्तारण और भविष्य में बढ़ने वाले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का रास्ता तलाशने के लिए महानगरपालिका के नगरसेवक, विभिन्न समितियों के सदस्य और अधिकारी तीन दिवसीय अध्ययन दौरे पर गोवा पहुंचे हैं।
इस दौरे का उद्देश्य गोवा में लागू आधुनिक कचरा प्रबंधन तकनीकों, कचरे से खाद और बायोगैस उत्पादन तथा घरों से कचरा एकत्र करने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की पूरी व्यवस्था को समझना है।
शहर में जमा 16 लाख मीट्रिक टन कचरा, निस्तारण व्यवस्था पर संकट
वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में लगातार बढ़ती आबादी और शहरीकरण के साथ प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। दूसरी ओर, कचरे के प्रसंस्करण और निस्तारण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पाने के कारण महानगरपालिका के कचरा निस्तारण स्थल पर करीब 16 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा होने की जानकारी सामने आई है।
इतनी बड़ी मात्रा में जमा कचरा शहर की स्वच्छता व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए महानगरपालिका को आधुनिक तकनीक, पर्याप्त प्रसंस्करण क्षमता और दीर्घकालीन योजना की आवश्यकता है।
इससे पहले महानगरपालिका ने शहर को कचरा मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘जीरो वेस्ट’ अभियान चलाया था। हाउसिंग सोसायटियों में स्थानीय स्तर पर कचरे का निस्तारण करने की योजनाएं भी शुरू की गई थीं। हालांकि, नागरिकों की सीमित भागीदारी और जागरूकता की कमी के कारण इन योजनाओं से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके।
गोवा दौरे में 99 नगरसेवकों सहित 132 प्रतिनिधि शामिल
महानगरपालिका द्वारा आयोजित यह अध्ययन दौरा 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इसमें 99 नगरसेवक, परिवहन समिति के 12 सदस्य तथा महानगरपालिका के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। इस तरह दौरे में कुल 132 प्रतिनिधियों की भागीदारी बताई गई है।
इस कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के मार्गदर्शन में किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दौरे का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि महानगरपालिका की राजनीति में विभिन्न मुद्दों पर एक-दूसरे का विरोध करने वाले सत्तापक्ष और विपक्ष के प्रतिनिधि भी कचरा प्रबंधन के इस अध्ययन दौरे में एक साथ शामिल हुए हैं।
गोवा के आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रकल्पों का करेंगे अध्ययन
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें गीले और सूखे कचरे को अलग करने, जैविक कचरे से खाद तैयार करने, बायोगैस उत्पादन और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की तकनीकों पर जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल का उत्तर गोवा स्थित मनोहर पर्रीकर घनकचरा प्रबंधन प्रकल्प और पणजी के आधुनिक कचरा प्रबंधन केंद्रों का दौरा करने का कार्यक्रम है।
इन प्रकल्पों में कचरे के संग्रहण, परिवहन, छंटाई, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अध्ययन किया जाएगा। विशेष रूप से यह समझने का प्रयास होगा कि गोवा में कचरे के प्रबंधन के लिए किन तकनीकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और उनमें से कौन-सी व्यवस्था वसई-विरार जैसे तेजी से विकसित होते शहर में लागू की जा सकती है।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत नई योजना तैयार करने की पहल
वसई-विरार की कचरा समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस योजना के माध्यम से कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, नई सुविधाओं की स्थापना और मौजूदा निस्तारण व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाने की तैयारी है।
गोवा अध्ययन दौरे से प्राप्त जानकारी भविष्य की परियोजनाओं की योजना बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
गोवा मॉडल को वसई-विरार में लागू करने का प्रयास: महापौर अजीव पाटील
वसई-विरार महानगरपालिका के महापौर अजीव पाटील के अनुसार, गोवा और पणजी में संचालित कचरा प्रबंधन प्रकल्पों का प्रत्यक्ष अध्ययन करना इस दौरे का मुख्य उद्देश्य है।
उन्होंने बताया कि वहां अपनाई गई सफल व्यवस्थाओं को समझकर वसई-विरार में बेहतर कचरा प्रबंधन और नए प्रकल्प स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
अध्ययन दौरे के बाद क्या बदलेगी वसई-विरार की तस्वीर?
वसई-विरार में कचरे की समस्या नई नहीं है। पूर्व में कई अभियान और योजनाएं शुरू होने के बावजूद शहर को अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
ऐसे में गोवा अध्ययन दौरे के बाद महानगरपालिका के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल रहेंगे।
16 लाख मीट्रिक टन जमा कचरे का निस्तारण कितने समय में होगा? गोवा से सीखी गई तकनीक को वसई-विरार में लागू करने के लिए कितनी राशि की आवश्यकता होगी? नए कचरा प्रसंस्करण प्रकल्प कब शुरू होंगे और पुराने अभियानों की असफलता से प्रशासन ने क्या सबक लिया है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह अध्ययन दौरा वसई-विरार की कचरा समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस बदलाव लाएगा या फिर शहर के नागरिकों को नई योजनाओं और आश्वासनों का इंतजार करना पड़ेगा?
फिलहाल महानगरपालिका के प्रतिनिधि गोवा में कचरा प्रबंधन के मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। अब शहर की नजर इस बात पर रहेगी कि दौरे से लौटने के बाद प्रशासन जमीन पर क्या कार्रवाई करता है।
मेट्रो सिटी समाचार | वसई-विरार
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