वी.वी. कंस्ट्रक्शन से जुड़े विशाल पाटिल, कमलेश पाटिल और राजकुमार भारती नामजद; एक मुख्य आरोपी गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच कर रही जांच

विरार: विरार पूर्व के नारंगी इलाके में स्थित ‘ध्रुवी हाइट्स–2’ इमारत में कथित फर्जी निर्माण प्रारंभ प्रमाणपत्र यानी CC के आधार पर फ्लैट बेचने और उनकी रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। विरार पुलिस ने वी.वी. कंस्ट्रक्शन से जुड़े तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में मामला दर्ज किया है। उपलब्ध अपडेट के अनुसार, इस मामले में एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

पुलिस विवरण के मुताबिक, आरोपियों के नाम विशाल विनायक पाटिल, कमलेश महादेव पाटिल और राजकुमार भारती हैं। नालासोपारा पूर्व निवासी शिकायतकर्ता मुकेश शिवकुमार उपाध्याय की शिकायत पर विरार पुलिस स्टेशन में 19 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 668/2026 दर्ज किया गया।

मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 316(5), 318(4), 337, 338 और 3(5) लगाई गई हैं। पुलिस रिकॉर्ड में घटनाक्रम की अवधि मार्च 2023 से शिकायत दर्ज होने तक बताई गई है।

नकली प्रमाणपत्र को असली बताकर रजिस्ट्री कराने का आरोप

शिकायत के अनुसार, नारंगी गांव के सर्वे नंबर 232, हिस्सा नंबर 5 पर स्थित ध्रुवी हाइट्स–2 इमारत से जुड़े आरोपियों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से फर्जी CC तैयार किया अथवा उसका इस्तेमाल किया।

आरोप है कि अनधिकृत निर्माण वाली इमारत के फ्लैट बेचते समय इस प्रमाणपत्र को असली बताया गया। इसके बाद दुय्यम निबंधक कार्यालय, वसई–6 में फ्लैटों के खरीद दस्तावेजों की पंजीकरण प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह आर्थिक लाभ हासिल करते हुए फ्लैट खरीदारों और शासन के साथ धोखाधड़ी की गई।

एक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी, अन्य भूमिकाओं की जांच

22 अक्टूबर के प्रकाशित अपडेट में एक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी का उल्लेख है। उपलब्ध पुलिस विवरण में भी 19 अक्टूबर को गिरफ्तारी की प्रविष्टि दिखाई देती है। हालांकि, साझा दस्तावेज के दिखाई दे रहे हिस्से में गिरफ्तार व्यक्ति का नाम स्पष्ट नहीं है।

मामले की आगे की जांच वसई क्राइम ब्रांच यूनिट–2 के पुलिस उपनिरीक्षक संतोष घाडगे कर रहे हैं। जांच में कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने, उसका इस्तेमाल करने और फ्लैटों की बिक्री तथा दस्तनोंदणी में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होनी है।

निर्माण अनुमति और दस्तनोंदणी की जांच अहम

इस प्रकरण ने इमारत की निर्माण अनुमति, CC की सत्यता और फ्लैटों के पंजीकरण में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कथित फर्जी प्रमाणपत्र किसने तैयार किया, उसकी जांच किस स्तर पर हुई और संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड में क्या दर्ज है—इन सवालों के जवाब जांच से सामने आएंगे।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। उपलब्ध दस्तावेजों में आरोपियों का पक्ष शामिल नहीं है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

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