महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने अनुसूचित जाति विकास महामंडलों की कर्ज प्रक्रिया सरल बनाने और शासन हमी की अवधि बढ़ाने का फैसला किया, जिससे प्रलंबित प्रकरणों को गति मिलेगी।
महाराष्ट्र,12अगस्त: महाराष्ट्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण से जुड़ी विभिन्न महामंडलों की कर्ज योजनाओं को और अधिक सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में महात्मा फुले मागासवर्ग विकास महामंडल , संत रोहिदास चर्मोद्योग व चर्मकार विकास महामंडल , और साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्णा साठे विकास महामंडल की योजनाओं के अंतर्गत कर्ज की गारंटी शर्तों में ढील दी गई है। अब ₹2 लाख तक के कर्ज के लिए सिर्फ एक गारंटर की आवश्यकता होगी, और ₹2 से ₹5 लाख तक के कर्ज के लिए भी एक ही गारंटर पर्याप्त होगा, पहले यह संख्या दो थी।
- 💼 रोजगार व शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को मिलेगा बढ़ावा
नवीन संशोधनों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि गारंटर के पास या तो स्थायी संपत्ति होनी चाहिए या फिर वह सरकारी, अर्धसरकारी या अनुदानित संस्थान में कार्यरत होना चाहिए। यह कदम खासकर उन लाभार्थियों के लिए उपयोगी होगा जो छोटे व्यवसाय या शिक्षा के लिए कर्ज लेना चाहते हैं। इसके अलावा, इन योजनाओं में गारंटी के तौर पर लाभार्थी और गारंटर दोनों की संपत्तियों पर बंधक लगाया जाएगा। इससे शैक्षणिक कर्ज, बीज पूंजी, लघु ऋण जैसी योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, जो खासकर सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए वरदान साबित होंगी।
- 🏦 राज्य सरकार ने बढ़ाई वित्तीय गारंटी की अवधि
राज्य सरकार ने इन महामंडलों को मिलने वाली शासन हमी (गवर्नमेंट गारंटी) की अवधि को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। इसमें महात्मा फुले मागासवर्ग विकास महामंडल को ₹600 करोड़, अण्णा साठे महामंडल को ₹100 करोड़, और संत रोहिदास चर्मोद्योग महामंडल को ₹50 करोड़ की हमी राशि का प्रावधान शामिल है। इस निर्णय से न केवल पहले से लंबित कर्ज प्रकरणों को निपटाने में मदद मिलेगी, बल्कि नए पात्र लाभार्थियों को भी समय पर कर्ज मिल सकेगा। यह पहल राज्य के सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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