वसई-विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका के अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती मरीजों को अब उपचार के साथ मुफ्त पौष्टिक नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में महापालिका काम कर रही है। VVCMC आरोग्य समिति के सभापति निलेश देशमुख ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था भी स्वास्थ्य पैकेज का हिस्सा है।
देशमुख के मुताबिक, वसई-विरार महानगरपालिका के अंतर्गत फिलहाल नौ अस्पताल कार्यरत हैं और इनमें से सात अस्पतालों में एकीकृत स्वास्थ्य योजना लागू की गई है। इन्हीं अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सरकारी योजना की मौजूदा जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में एकीकृत महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत–PM-JAY के तहत पात्र श्रेणियों के परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। योजना में 34 चिकित्सा विशेषज्ञताओं के तहत 1,356 हेल्थ बेनिफिट पैकेज शामिल हैं।
इलाज के पैकेज में मरीज का भोजन भी शामिल
इस योजना की खास बात यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज का पैकेज केवल दवाइयों, जांच और ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। आधिकारिक MJPJAY जानकारी के मुताबिक पैकेज में बेड चार्ज, नर्सिंग, डॉक्टर और विशेषज्ञों की फीस, ICU और OT शुल्क, दवाइयां, इम्प्लांट, जांच के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती मरीज का भोजन भी शामिल है। योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों को मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए निलेश देशमुख ने कहा कि मरीज के बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए पौष्टिक भोजन बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन मरीजों तक समय पर और अच्छी गुणवत्ता में पहुंचना चाहिए।
एक सेंट्रल किचन के बजाय स्थानीय स्तर पर व्यवस्था की तैयारी
वसई-विरार शहर महानगरपालिका का क्षेत्र करीब 311 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और मनपा के अस्पताल अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं। देशमुख ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक अस्पताल नायगांव क्षेत्र में है, दूसरा चंदनसार में जबकि वसई गांव सहित अन्य स्थानों पर भी अस्पताल संचालित हैं। ऐसी स्थिति में एक ही सेंट्रल किचन से सभी अस्पतालों में सुबह की चाय-नाश्ता और निर्धारित समय पर भोजन पहुंचाने में व्यावहारिक दिक्कत आ सकती है। इसी को देखते हुए व्यवस्था में बदलाव का विचार किया गया है।
निलेश देशमुख ने बताया कि प्रत्येक अस्पताल के आसपास काम कर रहे महिला बचत समूहों, स्थानीय खानावलों या निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले किचन संचालकों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। महानगरपालिका संबंधित किचन की स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और अन्य आवश्यक मानकों की जांच करेगी। इसके बाद नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाकर योग्य संस्थाओं या समूहों को काम दिए जाने की योजना है।
इस कदम से जहां मरीजों को अस्पताल के नजदीक तैयार किया गया ताजा भोजन मिलने में आसानी हो सकती है, वहीं स्थानीय महिला बचत समूहों और छोटे भोजन व्यवसायों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
स्वास्थ्य से जुड़े प्रस्ताव पहले आरोग्य समिति में आएं: देशमुख
इस दौरान आरोग्य सभापति निलेश देशमुख ने महानगरपालिका में स्वास्थ्य संबंधी प्रस्तावों की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वैद्यकीय आरोग्य समिति एक सलाहकार समिति है। उसके पास सीधे प्रशासनिक अधिकार भले सीमित हों, लेकिन महापालिका में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर समिति के साथ चर्चा और सलाह-मशविरा होना चाहिए।
देशमुख के मुताबिक, महानगरपालिका में लंबे समय तक प्रशासकीय व्यवस्था रहने के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई प्रस्ताव सीधे स्थायी समिति अथवा महासभा स्तर तक भेजे जाने की प्रक्रिया बनी रही। अब निर्वाचित व्यवस्था लौटने के बाद स्वास्थ्य संबंधी विषयों को पहले आरोग्य समिति के सामने रखकर उस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में महापौर और आयुक्त के समक्ष भी मुद्दा रखा गया है, ताकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रस्ताव आरोग्य समिति में चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया में भेजा जाए।
सात अस्पतालों में योजना, अब भोजन व्यवस्था पर फोकस
देशमुख के बयान के मुताबिक, VVCMC के नौ अस्पतालों में से सात में महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत से जुड़ी एकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था लागू होने के बाद अब मरीजों को मिलने वाली अन्य अनिवार्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
अगला महत्वपूर्ण कदम अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए नाश्ता और पौष्टिक भोजन की व्यवस्थित आपूर्ति शुरू करना है।
हालांकि किस अस्पताल में भोजन सेवा कब से शुरू होगी, टेंडर की प्रक्रिया और प्रति मरीज भोजन व्यवस्था का स्वरूप क्या होगा, इसकी विस्तृत प्रशासनिक जानकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।
निलेश देशमुख के अनुसार, महानगरपालिका का प्रयास है कि मरीज को इलाज के साथ बेहतर और पौष्टिक भोजन भी मिले, ताकि स्वास्थ्य योजना का लाभ केवल उपचार तक सीमित न रहे।
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