रविवार 13 जुलाई को आदित्य ठाकरे ने नायगांव और जुचंद्र का दौरा किया। अपने भाषण में उन्होंने मराठी अस्मिता और शिवसेना शाखाओं को लेकर विवादास्पद बयान दिए। साथ ही उन्होंने धारावी पुनर्विकास और भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधा।
वसई, 13 जुलाई: आज शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने नायगांव और जुचंद्र क्षेत्र का दौरा किया।अपने संबोधन में उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मराठी अस्मिता और महिला सुरक्षा के मुद्दे से की।
उन्होंने कहा कि जहां-जहां शिवसेना की शाखाएं हैं, वहां महिलाएं और बेटियां सुरक्षित महसूस करती हैं क्योंकि वहां मराठी समुदाय की संख्या ज्यादा है। उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्यों के लोग इन इलाकों में कम हैं, इसलिए माहौल मराठी संस्कृति के अनुकूल रहता है।
आदित्य ठाकरे ने धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि फडणवीस सरकार ने अडानी समूह के साथ मिलकर 300 एकड़ जमीन का सौदा किया है जो सिर्फ सपने दिखाने का तरीका है। लोगों से जमीन और कागज लेकर बाद में उन्हें पछतावा होगा क्योंकि असली फायदा अडानी जैसे बड़े लोगों को दिया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि आगामी चुनाव में शिवसेना को जिताना मराठी भाषा और अस्मिता की रक्षा के लिए जरूरी है। उनका स्पष्ट कहना था कि वे वोट सिर्फ उन लोगों से मांगेंगे जिन्हें मराठी अस्मिता की चिंता है।
आदित्य ठाकरे ने अपने भाषण में यह भी जोर देकर कहा कि उनके नेता और कार्यकर्ता ऐसे नहीं हैं जो शराब पीकर कहीं पैसे का बैग लेकर बैठे मिलें, या जुए-पत्तों जैसे गैर-जिम्मेदाराना कामों में शामिल हों। उन्होंने कहा कि शिवसेना (उद्धव गुट) का हर कार्यकर्ता पार्टी की मर्यादा और मराठी संस्कारों का प्रतिनिधित्व करता है। उनका दावा था कि उनकी पार्टी के नेता कभी ऐसी हरकत नहीं करेंगे जिससे शिवसेना का नाम बदनाम हो या जनता का विश्वास डगमगाए। यह टिप्पणी अप्रत्यक्ष रूप से विरोधी दलों के नेताओं पर कटाक्ष मानी जा रही है।
इस बीच मीरा रोड और विरार में भाषा विवाद के बीच मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में आदित्य ठाकरे के दौरे और बयानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या उनका यह रुख इन घटनाओं को जायज ठहराता है? आने वाले दिनों में और क्या बयान दिए जाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। वहीं, 18 जुलाई को राज ठाकरे के मीरा रोड दौरे पर भी लोगों की नजरें टिकी हैं।
धारावी सिर्फ झोपड़पट्टी नहीं है — यह लाखों लोगों की ज़िंदगी, रोज़गार, पहचान और मेहनत का केंद्र है। लेकिन आज इस बस्ती के 300 एकड़ क्षेत्र पर सरकार और कॉर्पोरेट की संयुक्त नजर है, जिसे “पुनर्विकास” का नाम दिया जा रहा है।
विरार में ऑटो चालक से मारपीट, मराठी भाषा विवाद में पुलिस ने मामला किया दर्ज
असल में, यह विकास नहीं, बल्कि विस्थापन है। और यह मामला सिर्फ धारावी तक सीमित नहीं, पूरे मुंबई की 1600 एकड़ ज़मीन को चुपचाप कॉर्पोरेट के हवाले किए जाने का हिस्सा है।
🔹 कहने को पुनर्विकास, असल में विस्थापन
सरकार दावा करती है कि धारावी के लोगों को 500 स्क्वायर फीट के नए घर दिए जाएंगे। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि जिनको आज तक झोपड़ी का वैध हक नहीं मिला, उन्हें कचरे के ढेर जैसे इलाकों में भेजा जा रहा है।
बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स को ज़मीन कौड़ियों के दाम पर दी जा रही है, और स्थानीय लोगों को कोई हिस्सेदारी नहीं।
🔹 लोकतंत्र ठप, जनता बेबस
-
3 वर्षों से मनपा चुनाव नहीं हुए
-
फैसले प्रशासकों के हाथों में
-
पुनर्विकास योजनाएं जनता से बिना चर्चा के पारित
-
पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी
🔹 लाडकी बहन योजना और राजनीतिक दोहरापन
सरकार की “लाडकी बहन” योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता के नाम पर राजनीतिक दिखावा किया गया। अब वही महिलाएं सरकारी दफ्तरों में धमकाई जा रही हैं।
जो महिलाएं अपना हक मांग रही हैं, उन्हें ‘फाइल में फंसाने’ की धमकी दी जा रही है।
“यह सिर्फ घर का मुद्दा नहीं है, यह आत्मसम्मान और पहचान का सवाल है।”
📌 अब सवाल यह है:
-
क्या विकास के नाम पर कॉर्पोरेट को ज़मीन सौंपना सही है?
-
क्या धारावी के लोगों की मर्जी और भागीदारी के बिना पुनर्विकास लोकतांत्रिक है?
-
क्या मुंबई की शक्ल आम जनता की होगी या सिर्फ चंद कॉर्पोरेट घरानों की?
विरार में ऑटो चालक से मारपीट, मराठी भाषा विवाद में पुलिस ने मामला किया दर्ज