रोहित पवार के SIR और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर BVA प्रमुख हितेंद्र ठाकुर की प्रतिक्रिया; बोले— चुनाव आयोग और सरकार को जवाब देना चाहिए, देश में अघोषित सुपर इमरजेंसी जैसे हालात

नालासोपारा | मेट्रो सिटी समाचार

नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से हजारों नाम गायब होने और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार द्वारा SIR सर्वे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर उठाए गए सवालों पर अब बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) के अध्यक्ष और पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर की प्रतिक्रिया सामने आई है। ठाकुर ने नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में कथित भारी कमी पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

दरअसल, रोहित पवार ने नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में 2024 के चुनाव में मतदान करने वाले लगभग 50 हजार मतदाताओं के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से गायब होने का आरोप लगाया है। उनके इस बयान की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए हितेंद्र ठाकुर ने मतदाताओं की संख्या में आए कथित बदलाव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

‘6 लाख मतदाता थे, अब सिर्फ 3 लाख कैसे रह गए?’

हितेंद्र ठाकुर ने कहा कि नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में पहले लगभग छह लाख मतदाता थे, लेकिन अब उनकी संख्या तीन लाख रह जाने की बात सामने आ रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि वसई-विरार और नालासोपारा तेजी से जनसंख्या बढ़ने वाले शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं। ऐसे में मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बजाय इतनी बड़ी संख्या में कम कैसे हो सकती है?

ठाकुर ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में लगभग साढ़े तीन लाख लोगों ने मतदान किया था। यदि अब कुल मतदाताओं की संख्या ही लगभग तीन लाख बताई जा रही है, तो इस अंतर को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने पूछा कि आखिर चुनाव के समय बढ़े हुए मतदाता कहां से आए थे और अब इतनी बड़ी संख्या में नाम कैसे कम हो गए?

‘आने वाले चुनाव में ये मतदाता फिर दिखाई देते हैं या नहीं, देखना होगा’

हितेंद्र ठाकुर ने कहा कि फिलहाल कोई चुनाव नहीं हो रहा है, लेकिन आने वाले चुनावों में देखना होगा कि मतदाता सूची से कथित तौर पर गायब हुए ये नाम दोबारा सामने आते हैं या नहीं।

उन्होंने मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर पारदर्शिता की आवश्यकता जताई और कहा कि इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और सत्ता में बैठे लोगों की है।

ठाकुर के मुताबिक, मतदाताओं की संख्या में इतने बड़े अंतर को लेकर जनता के मन में संदेह पैदा होना गंभीर बात है।

‘राजा संदेह से ऊपर होना चाहिए, यहां हर तरफ शक है’

चुनावी व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए हितेंद्र ठाकुर ने कहा कि राजा हमेशा संदेह से ऊपर होना चाहिए, लेकिन यहां हर तरफ संदेह की स्थिति बनी हुई है।

उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की आलोचना करते हुए कहा कि देश में ‘हम करें सो कायदा’ जैसी स्थिति पैदा हो गई है।

इतना ही नहीं, ठाकुर ने वर्तमान परिस्थितियों की तुलना आपातकाल से करते हुए कहा कि आज की स्थिति इमरजेंसी से भी खराब है और देश में एक तरह की ‘अघोषित सुपर इमरजेंसी’ चल रही है।

यह टिप्पणी ठाकुर की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

‘मैं चुनाव हारा, लेकिन किसी पर शक नहीं किया’

अपने विधानसभा चुनाव में हुए पराजय का उल्लेख करते हुए हितेंद्र ठाकुर ने कहा कि उन्होंने अपनी हार पर आपत्ति जरूर जताई थी, लेकिन किसी व्यक्ति या संस्था पर संदेह नहीं किया।

उन्होंने कहा कि लोग आज भी सवाल करते हैं कि बहुजन विकास आघाड़ी चुनाव कैसे हार गई, लेकिन उनकी ओर से किसी पर सीधे आरोप नहीं लगाए गए।

ठाकुर ने साफ किया कि फिलहाल इस मुद्दे पर उनकी कोई नई राजनीतिक भूमिका नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई कितना भी चिल्लाए या सवाल उठाए, सत्ता में बैठे लोगों पर उसका कोई असर नहीं पड़ता।

रोहित पवार के आरोपों के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर नजर

रोहित पवार ने नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर जो सवाल उठाए हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 2024 के विधानसभा चुनाव में मतदान करने वाले लोगों और SIR प्रक्रिया के बाद उपलब्ध मतदाता सूची के बीच कथित अंतर का है।

हालांकि, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र से वास्तव में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए, किन कारणों से हटाए गए और कितने नामों को लेकर आपत्तियां या सुधार की प्रक्रिया चल रही है।

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के पीछे स्थानांतरण, मृत्यु, दोहरी मतदाता पंजीकरण या अन्य पात्रता संबंधी कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल मतदाताओं की संख्या में अंतर के आधार पर वोट चोरी या फर्जी मतदान साबित नहीं होता।

नालासोपारा में लगभग छह लाख से तीन लाख मतदाता रह जाने के हितेंद्र ठाकुर के दावे की भी आधिकारिक विधानसभा-वार मतदाता सूची से पुष्टि होना आवश्यक है।

फिलहाल, रोहित पवार के आरोपों और हितेंद्र ठाकुर की प्रतिक्रिया ने नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग मतदाताओं की संख्या में कथित अंतर और इसके पीछे के कारणों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है।