नायगांव पुलिस ने किया कथित मुआवजा घोटाले का खुलासा; करीब दो लाख वर्गफुट में बिना अनुमति निर्माण, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी आरोप

वसई-विरार | मेट्रो सिटी समाचार

विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय महामार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन पर सरकारी मुआवजा हासिल करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आया है। मीरा-भाईंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत नायगांव पुलिस ने इस कथित साजिश का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने हाईवे परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की जानकारी मिलने के बाद जमीन पर बिना अनुमति सैकड़ों कमरे बनवाए, ताकि निर्माण के बदले सरकार से नुकसानभरपाई यानी मुआवजा हासिल किया जा सके।

पुलिस की 23 अक्टूबर 2026 की प्रेस नोट के अनुसार, यह मामला नायगांव पुलिस स्टेशन की सीमा में आने वाले मौजे मोरी गांव की विभिन्न सर्वे नंबर वाली जमीनों से जुड़ा है। यहां कथित तौर पर लगभग 2 लाख वर्गफुट क्षेत्र में करीब 2,000 कमरों का अनधिकृत निर्माण किया गया था। जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने लगभग 1,600 बॉक्स टाइप कमरों के निर्माण और मुआवजे के लिए फर्जी कागजात तैयार किए जाने का आरोप लगाया है।

2022-23 में रची गई थी कथित साजिश

पुलिस जांच के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2023 के दौरान आरोपियों को जानकारी मिली थी कि मौजे मोरी क्षेत्र की कुछ जमीनों का अधिग्रहण विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय महामार्ग कॉरिडोर के लिए किया जाना है।

पुलिस का आरोप है कि इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए संबंधित जमीन मालिकों और अन्य व्यक्तियों ने आपसी मिलीभगत से जमीनों पर बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के निर्माण शुरू कराया।

इन निर्माणों में लगभग 10 बाय 10 फुट आकार के बॉक्स टाइप कमरे बनाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, इनमें से अनेक कमरे केवल ढांचे के रूप में तैयार किए गए थे। जांच एजेंसी को संदेह है कि इनका उद्देश्य वास्तविक आवासीय उपयोग के बजाय सरकारी भूमि अधिग्रहण के दौरान निर्माण के बदले आर्थिक मुआवजा प्राप्त करना था।

मुआवजे के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू निर्माण से संबंधित दस्तावेजों में कथित जालसाजी का है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अवैध निर्माण को सरकारी मुआवजे की शर्तों के अनुरूप दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी कागजात तैयार किए थे।

आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पोमण क्षेत्र की ग्रुप ग्राम पंचायत में घरपट्टी यानी संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया में भी किया गया।

जांच में दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं।

तलाठी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला

इस प्रकरण में तलाठी सजा पोमण की शिकायत के आधार पर नायगांव पुलिस स्टेशन में 29 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 878/2026 दर्ज किया गया था।

शुरुआत में महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगररचना अधिनियम, 1966 की धारा 52, 53 और 54 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

बाद में जांच के दौरान सामने आए कथित फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के पहलुओं को देखते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 474 और 120(B) भी मामले में जोड़ी गईं।

नायगांव पुलिस ने इन चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

नायगांव पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय हजारे के निर्देश पर आरोपियों की तलाश और मामले की जांच के लिए तीन पुलिस टीमें बनाई गई थीं।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

  1. अमित माताप्रसाद मिश्रा — उम्र 43 वर्ष
  2. प्रकाशचंद्र अमरनाथ शुक्ला — उम्र 51 वर्ष
  3. जगनारायण बालकरण गुप्ता — उम्र 52 वर्ष
  4. राजकुमार मोतीलाल यादव — उम्र 51 वर्ष

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों की इस मामले में व्यक्तिगत भूमिका, संबंधित जमीनों के लेनदेन, निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए कथित तौर पर किए गए प्रयासों की जांच कर रही है।

इसके अलावा इस कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने का काम भी जारी है।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

विरार-अलीबाग महामार्ग जैसी बड़ी सरकारी परियोजना के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन पर इतने बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण होने का मामला प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

यदि प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की जानकारी मिलने के बाद लगभग 1,600 से 2,000 कमरों का निर्माण किया गया, तो इतने बड़े निर्माण कार्य के दौरान संबंधित स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?

बिना अनुमति हुए निर्माणों की जानकारी संबंधित विभागों को कब मिली? अवैध निर्माण रोकने के लिए समय रहते क्या कार्रवाई की गई? और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची?

ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

हालांकि, पुलिस की प्रेस नोट में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपियों को सरकार से वास्तव में कोई मुआवजा प्राप्त हुआ था या नहीं। फिलहाल मामला मुआवजा हासिल करने की कथित साजिश और उससे जुड़े निर्माण एवं दस्तावेजी फर्जीवाड़े का है।

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

यह कार्रवाई मीरा-भाईंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, अपर पुलिस आयुक्त संजय शिंदे, पुलिस उपायुक्त अशोक विरकर और सहायक पुलिस आयुक्त देवेंद्र पोळ के मार्गदर्शन में की गई।

नायगांव पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय हजारे की देखरेख में पुलिस निरीक्षक (अपराध) अभिजीत मडके और अन्य पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों की टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी में भूमिका निभाई।

पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है और इस कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।

विरार-अलीबाग महामार्ग परियोजना की जमीन पर सामने आए इस मामले ने एक बार फिर सरकारी भूमि अधिग्रहण, अवैध निर्माण, संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच और मुआवजा वितरण की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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