मुंबई | 6 नवंबर 2026: कुर्ला से ट्रॉम्बे तक रेलवे लाइन के किनारे रहने वाले झोपड़पट्टीवासियों को मिले बेदखली नोटिस के बाद पुनर्वास का सवाल राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) को प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का निर्देश दिया है।
दो महीने से नोटिस का विरोध
स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार रेलवे प्रशासन ने करीब दो महीने पहले झोपड़ियों को हटाने के नोटिस दिए थे, लेकिन वैकल्पिक आवास की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे 15 वर्षों से अधिक समय से इस इलाके में रह रहे हैं। चिखलीवाड़ी और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स मुख्यालय के आसपास से लेकर माहुल तक के हिस्से इस मुद्दे से जुड़े बताए गए हैं।
बैठक में यह मांग रखी गई कि किसी भी कार्रवाई से पहले पात्रता, परिवारों की संख्या, उपलब्ध पुनर्वास स्थल और स्थानांतरण की समयसीमा स्पष्ट की जाए। शिंदे ने SRA को BMC, रेलवे और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर DPR सौंपने के लिए कहा है। प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की समस्या से बचना भी बताया गया है।
रेलवे और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी
रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने का अधिकार रेलवे के पास है, जबकि पुनर्वास और पात्रता के कई पहलू राज्य सरकार, SRA और महानगरपालिका से जुड़े होते हैं। इसी कारण केवल नोटिस जारी होने से समस्या का समाधान नहीं होता। DPR में सर्वेक्षण, पात्र परिवारों की सूची, जमीन की उपलब्धता, निर्माण लागत और समयसीमा जैसे बिंदु शामिल होने अपेक्षित हैं।
बैठक में चेंबूर पूर्व के खारदेव नगर स्थित BMC कर्मचारियों की चॉल और महानगरपालिका कर्मचारियों की सहकारी आवास सोसायटियों के पुनर्विकास पर भी चर्चा हुई। सरकार ने ऐसे पुनर्विकास में लिए जाने वाले प्रीमियम के संबंध में नई नीति पर विचार करने का संकेत दिया है।
मुंबई में बेदखली और अतिक्रमण कार्रवाई से जुड़ा हालिया मामला पढ़ें—सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बोरीवली में BMC की कार्रवाई। पुनर्वास और परियोजना संबंधी फैसलों में लिखित DPR और सार्वजनिक पात्रता सूची पारदर्शिता के लिए जरूरी मानी जाती है।
अभी अंतिम पुनर्वास योजना नहीं
SRA को DPR बनाने का निर्देश मिला है, लेकिन पुनर्वास स्थल, लाभार्थियों की अंतिम संख्या या घर मिलने की तारीख अभी तय नहीं है। इसलिए इसे अंतिम मंजूरी या तत्काल घर आवंटन नहीं समझा जाना चाहिए। आगे की स्थिति DPR, रेलवे के निर्णय और संबंधित एजेंसियों की मंजूरी के बाद स्पष्ट होगी।




