मुंबई: बीएमसी ने सड़क कंक्रीटीकरण परियोजना के तीसरे चरण की टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब ₹8,614.56 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस चरण में शहर, पूर्वी उपनगर और पश्चिमी उपनगर की सड़कों पर काम प्रस्तावित है। मुख्य सड़कों के साथ जंक्शन, किनारे की पट्टियां और पहले से बनी सीमेंट-कंक्रीट सड़कों के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत भी दायरे में होगी।
यह नया चरण ऐसे समय आगे बढ़ाया जा रहा है जब पहले दो चरणों का काम कई इलाकों में जारी है और सड़कों की खुदाई से धूल, ट्रैफिक तथा स्थानीय आवाजाही की परेशानियां सामने आ रही हैं। इसलिए परियोजना का आकार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही काम का चरणबद्ध प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण भी जरूरी होगा।
1,261 सड़कों की पूरी चौड़ाई, 176 सड़कों की साइड स्ट्रिप
उपलब्ध टेंडर विवरण के मुताबिक, तीसरे चरण में 1,261 सड़कों की करीब 313 किलोमीटर लंबाई पर पूरी चौड़ाई में कंक्रीटीकरण प्रस्तावित है। इसके अलावा 176 सड़कों पर लगभग 139 किलोमीटर लंबी साइड स्ट्रिप और संबंधित हिस्सों का काम शामिल है। इस तरह परियोजना का कुल कार्यक्षेत्र करीब 452 किलोमीटर बताया गया है।
बीएमसी सात अलग-अलग टेंडर के जरिए काम बांटने की तैयारी में है। इसमें मौजूदा सड़कों को मजबूत करना, क्षतिग्रस्त सीमेंट-कंक्रीट पैनलों की मरम्मत, सड़क किनारे के हिस्सों और जंक्शनों में सुधार तथा जरूरत वाले स्थानों पर मैस्टिक डामर का काम शामिल हो सकता है। काम जनवरी 2027 में शुरू करने का लक्ष्य है, लेकिन तीसरे चरण के पूरा होने की अंतिम समय-सीमा अभी घोषित नहीं हुई है।
तीनों चरणों का अनुमानित खर्च ₹25,600 करोड़ से अधिक
पहले दो चरणों पर लगभग ₹17,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। तीसरे चरण की ₹8,614.56 करोड़ लागत जोड़ने पर सड़क कंक्रीटीकरण कार्यक्रम का कुल अनुमानित खर्च ₹25,600 करोड़ से अधिक हो जाता है। बीएमसी का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य लंबे समय तक टिकने वाली और बारिश में गड्ढों से कम प्रभावित होने वाली सड़कें तैयार करना है।
उपलब्ध प्रगति आंकड़ों के अनुसार, तीनों चरण मिलाकर 2,179 सड़कों की लगभग 715 किलोमीटर लंबाई परियोजना के दायरे में है। इनमें 1,589 सड़कों का काम पूरा और 316 सड़कों का काम आंशिक रूप से पूरा बताया गया है। पहले चरण के लिए 12 दिसंबर और दूसरे चरण के लिए मई 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
धूल और हवा की गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती
मुंबई में सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा की गुणवत्ता पर चिंता बढ़ती है। सड़क निर्माण, तोड़फोड़, खुले में रखा मलबा और वाहनों से उड़ती धूल PM10 प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिनी जाती है। बड़े पैमाने पर एक साथ खुदाई होने पर स्थानीय स्तर पर धूल और ट्रैफिक जाम दोनों बढ़ सकते हैं।
मेट्रो सिटी समाचार ने हाल में मुंबई में धूल कम करने के विशेष सफाई अभियान और वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट की चिंता की जानकारी दी थी। नई सड़क परियोजना में नियमित पानी का छिड़काव, मलबे को ढंककर ले जाना, मशीनों की धूल रोकने वाली व्यवस्था और एक साथ अत्यधिक सड़कें न खोदना महत्वपूर्ण होगा।
यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को क्या देखना होगा?
टेंडर फाइनल होने के बाद अलग-अलग वार्डों में काम का वास्तविक कैलेंडर स्पष्ट होगा। नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि किस सड़क पर कब काम शुरू होगा, ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक रास्ता क्या होगा और खोदी गई सड़क कितने दिनों में दोबारा खुलेगी। परियोजना की सफलता केवल कंक्रीट बिछाने से नहीं, बल्कि समय-सीमा, गुणवत्ता और रोजमर्रा की परेशानी कम रखने से तय होगी।




