मुंबई, 13 अक्टूबर 2026। महाराष्ट्र में अवैध निर्माण और फ्लैट खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब बिना जरूरी सरकारी अनुमति के बनाए गए फ्लैटों और मंजूर नक्शे से अधिक क्षेत्रफल में हुए निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद राजस्व विभाग ने इस संबंध में नया परिपत्र जारी किया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में 22 सितंबर 2026 को हुई बैठक में दिए गए निर्देशों के आधार पर यह कदम उठाया गया है।
राजस्व विभाग की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी परिपत्र के मुताबिक, राज्य के सभी दुय्यम निबंधकों यानी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को अनधिकृत निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की रजिस्ट्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
किन फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं होगी?
नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना में फ्लैट की पहली बिक्री का एग्रीमेंट, खरीद-बिक्री का दस्तावेज, डीड ऑफ अपार्टमेंट और ट्रांसफर डीड की रजिस्ट्री के लिए जरूरी मंजूरियों और निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
जहां आवश्यक अनुमतियां उपलब्ध नहीं होंगी या फ्लैट का क्षेत्रफल स्वीकृत नक्शे से अधिक पाया जाएगा, वहां संबंधित दस्तावेजों की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी।
रजिस्ट्री के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन निर्माण परियोजनाओं में महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी महारेरा के तहत पंजीकरण आवश्यक है, वहां महारेरा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसे निर्धारित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
इसके अलावा संबंधित प्राधिकरण से मंजूर बिल्डिंग प्लान में फ्लैट का क्षेत्रफल दर्ज होना जरूरी है।
अन्य निर्माण परियोजनाओं के मामलों में सक्षम प्राधिकरण की बिल्डिंग परमिशन या प्रारंभ प्रमाणपत्र, मंजूर निर्माण नक्शा, क्षेत्रफल संबंधी विवरण और आवश्यक अन्य दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
नियम तोड़ने वाले सब-रजिस्ट्रार पर होगी कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में रजिस्ट्री अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।
यदि कोई दुय्यम निबंधक इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए अनधिकृत निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की रजिस्ट्री करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य ऐसे निर्माणों की खरीद-बिक्री पर नियंत्रण लगाना है, जिनके पास आवश्यक अनुमति नहीं है या जिनमें मंजूर क्षेत्रफल से अधिक निर्माण किया गया है।
फ्लैट खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
इस निर्णय का सीधा असर मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, वसई-विरार और पालघर सहित पूरे महाराष्ट्र के रियल एस्टेट बाजार पर पड़ सकता है।
विशेष रूप से उन परियोजनाओं में फ्लैट खरीदने वाले लोगों को सावधानी बरतनी होगी, जहां बिल्डिंग परमिशन, मंजूर नक्शा, महारेरा रजिस्ट्रेशन या अन्य आवश्यक दस्तावेजों को लेकर सवाल हैं।
हालांकि सरकार के इस परिपत्र का मतलब यह नहीं है कि सभी पुरानी या अनधिकृत बताई जा रही इमारतों की पहले से हुई रजिस्ट्री स्वतः रद्द हो जाएगी। यह निर्देश संबंधित दस्तावेजों की नई रजिस्ट्री और उसके लिए जरूरी शर्तों से जुड़े हैं।
फ्लैट खरीदने से पहले मंजूर नक्शा, निर्माण की अनुमति, फ्लैट का वास्तविक क्षेत्रफल और लागू होने पर महारेरा की जानकारी जांचना अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
राज्य सरकार का यह फैसला अवैध निर्माण पर नियंत्रण और फ्लैट खरीदारों को संभावित धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मेट्रो सिटी समाचार | मुंबई, महाराष्ट्र
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