नालासोपारा, पालघर | मेट्रो सिटी समाचार: नालासोपारा पश्चिम में आरिफ आयुब शेख के खिलाफ दो अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद अब युवती द्वारा लगाए गए धर्म परिवर्तन के दबाव, अंधविश्वास के नाम पर डराने और धमकाने के आरोप भी चर्चा में हैं। युवती ने अपनी शिकायत में आरिफ के अलावा उसकी मां और एक अन्य व्यक्ति पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
पहला मामला 10 अक्टूबर 2026 को धार्मिक भावनाएं आहत करने और कथित आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री से जुड़ा दर्ज किया गया था। इसके दो दिन बाद, 12 अक्टूबर को एक युवती की शिकायत पर दुष्कर्म, मारपीट, धमकी और अन्य आरोपों के तहत दूसरी एफआईआर दर्ज हुई।
बुर्का पहनने और मुस्लिम बनने का दबाव डालने का आरोप
युवती ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि आरिफ और उसकी मां कथित तौर पर उस पर धार्मिक दबाव डाल रहे थे।
शिकायत के अनुसार, आरिफ की मां ने युवती को बुर्का पहनने के लिए कहा था। साथ ही कथित तौर पर उसे मुस्लिम बनने के लिए भी कहा गया।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि उसे बताया गया था कि भविष्य में हिंदू लड़कियां मुस्लिम बन जाएंगी और उसे भी मुस्लिम बन जाना चाहिए।
युवती के मुताबिक, उसने इस दबाव का विरोध किया था।
ये सभी बातें युवती द्वारा पुलिस को दिए गए बयान में लगाए गए आरोप हैं। इनकी सत्यता और परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच में होना बाकी है।
मृत मां का नाम लेकर डराने और परिवार से जान का खतरा बताने का आरोप
एफआईआर में युवती ने आरोप लगाया है कि आरिफ की मां ने उसकी दिवंगत मां को लेकर भी डराने वाली बातें कहीं।
शिकायत के अनुसार, युवती को कथित तौर पर कहा गया कि उसकी मां भूत बन गई है। साथ ही उसके परिवार के लोग उसे मार डालेंगे, इस प्रकार की बातें कहकर उसे डराने का आरोप भी लगाया गया है।
युवती ने दावा किया कि ऐसी बातों और धमकियों से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी।
इन आरोपों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या कथित तौर पर अंधविश्वास का डर दिखाकर युवती पर दबाव बनाया गया और क्या इस संबंध में अन्य कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं?
दुष्कर्म और धमकी देने का भी आरोप
दूसरी एफआईआर के मुताबिक, दिसंबर 2024 में सोशल मीडिया के माध्यम से युवती की आरिफ से पहचान हुई थी।
इसके बाद बातचीत और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इनकार करने का आरोप लगाया है। शिकायत में उसकी इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाने, मारपीट और निजी तस्वीरों तथा वीडियो के जरिए बदनाम करने की धमकियों का भी उल्लेख है।
इस मामले में आरिफ शेख के अलावा रुखसाना खान और साहिल खान को भी आरोपी बनाया गया है।
पहली FIR में धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
इससे पहले 10 अक्टूबर को दर्ज दूसरे मामले में आरिफ शेख पर हिंदू समाज और नवरात्रि से संबंधित कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत में महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री एक वेबसाइट पर प्रसारित किए जाने का भी आरोप है।
पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 299 और आईटी एक्ट की धारा 67(A) के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
युवती की शिकायत में कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं?
12 अक्टूबर को दर्ज मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m), 127(2), 115(2), 352, 351(2) और 3(5) लागू की हैं।
इनमें दुष्कर्म के दौरान गंभीर शारीरिक नुकसान, गलत तरीके से बंधक बनाना, चोट पहुंचाना, जानबूझकर अपमान करना, आपराधिक धमकी और साझा आपराधिक इरादे से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
सबसे गंभीर धारा 64(2)(m) में अपराध सिद्ध होने पर कम से कम 10 साल के कठोर कारावास से लेकर शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है।
धर्म परिवर्तन का दबाव और अंधविश्वास के आरोपों पर अतिरिक्त जांच की मांग
युवती के बयान में बुर्का पहनने, मुस्लिम बनने के लिए कथित दबाव डालने, मृत मां का नाम लेकर डराने और परिवार से जान का खतरा बताने जैसे आरोप सामने आने के बाद हिंदूवादी संगठनों की ओर से संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच और अतिरिक्त कानूनी धाराएं लगाने की मांग उठाई जा रही है।
संगठनों का आरोप है कि युवती के बयान में बताए गए कथित मानसिक दबाव, धार्मिक दबाव और डराने की घटनाओं की भी स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए।
विशेष रूप से आरिफ की मां की कथित भूमिका की जांच करते हुए यह निर्धारित करने की मांग की जा रही है कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित कानून, महाराष्ट्र के अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून या आपराधिक धमकी से संबंधित अन्य प्रावधान इस मामले में लागू होते हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन के लिए कहना, अंधविश्वास संबंधी बयान देना और कानून के तहत दंडनीय जबरन धर्म परिवर्तन या जादू-टोना संबंधी अपराध सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।
किसी अतिरिक्त धारा को लागू करने के लिए संबंधित कानून की आवश्यक शर्तें और साक्ष्य उपलब्ध होना जरूरी है।
अब पुलिस जांच पर नजर
दोनों मामलों में आरिफ शेख मुख्य आरोपी के रूप में नामजद है, जबकि युवती की शिकायत में दो अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या पुलिस युवती के कथित धार्मिक दबाव और अंधविश्वास के जरिए डराने के आरोपों की अलग से जांच करेगी?
क्या संबंधित डिजिटल साक्ष्यों और बातचीत की जांच की जाएगी?
और क्या जांच में पर्याप्त आधार मिलने पर अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी?
फिलहाल दोनों एफआईआर में दर्ज आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी या अदालत में दोष सिद्ध होने की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती।
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