मीरा-भायंदर: शहर में तेजी से खड़ी हो रही नई इमारतों और पानी की सीमित उपलब्धता के बीच महानगरपालिका ने नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को नल कनेक्शन नहीं देने का अपना फैसला फिलहाल कायम रखा है। प्रशासन का कहना है कि सूर्या परियोजना या किसी दूसरे स्रोत से अतिरिक्त पानी मिलने तक नई सोसायटियों को नियमित जलापूर्ति से जोड़ना मौजूदा उपभोक्ताओं की सप्लाई पर और दबाव डाल सकता है।

मीरा-भायंदर को STEM और MIDC के जरिए प्रतिदिन करीब 210 मिलियन लीटर पानी मिलता है। आबादी और निर्माण बढ़ने से मांग लगातार ऊपर जा रही है, जबकि सूखे की स्थिति में शहर की सप्लाई में 10 प्रतिशत कटौती भी लागू है। कई इलाकों को सप्ताह में दो दिन पानी नहीं मिलने की शिकायतें हैं। ऐसे में नई इमारतों को कनेक्शन देने के सवाल पर नगर प्रशासन ने फिलहाल रोक हटाने से इनकार किया है।

कुछ इमारतों को कनेक्शन मिलने के आरोप से बढ़ा विवाद

मामला सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है। अगस्त की महासभा में भाजपा नगरसेवक भगवती शर्मा ने आरोप लगाया था कि रोक लागू होने के बावजूद पानी कटौती के दौरान कुछ नई इमारतों को कनेक्शन दिए गए, जबकि दूसरी सोसायटियों के आवेदन ठराव का हवाला देकर रोक दिए गए। इस आरोप के बाद समान नियम लागू होने और फैसलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे।

महापौर डिंपल मेहता ने मामले की जांच के लिए समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता स्थायी समिति सभापति हसमुख गेहलोत करेंगे और इसमें सत्तापक्ष-विपक्ष के गटनेता, सभागृह नेता तथा वरिष्ठ नगरसेवक शामिल किए जाने हैं। समिति को यह देखना होगा कि रोक की अवधि में किन इमारतों को कनेक्शन मिले, उन्हें किस आधार पर मंजूरी दी गई और क्या सभी आवेदकों पर एक जैसे नियम लागू हुए। रिपोर्ट महासभा में रखे जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

नई सोसायटियों के खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा?

नए घरों के खरीदारों के लिए इसका सीधा मतलब है कि इमारत तैयार होने के बाद भी नियमित मनपा नल कनेक्शन मिलने में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में सोसायटियों को टैंकर या दूसरी अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे मासिक रखरखाव खर्च बढ़ता है। घर खरीदने से पहले उपलब्ध पानी, स्वीकृत कनेक्शन और बिल्डर की वैकल्पिक व्यवस्था को दस्तावेजों में जांचना जरूरी हो जाता है।

मीरा-भायंदर में पानी की अनियमित आपूर्ति पहले भी नागरिकों के लिए बड़ी समस्या रही है। इससे जुड़ी पृष्ठभूमि के लिए मेट्रो सिटी समाचार की मीरा-भायंदर जलापूर्ति संकट पर पिछली रिपोर्ट पढ़ी जा सकती है। फिलहाल नई सोसायटियों के लिए रोक की कोई निश्चित समाप्ति तारीख घोषित नहीं हुई है; फैसला अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने और प्रशासन की अगली समीक्षा पर निर्भर रहेगा।