अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मुंबई के प्रसिद्ध मुंबादेवी मंदिर में हर साल की तरह इस वर्ष भी भव्य ‘आम महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मां मुंबादेवी का श्रृंगार खासतौर पर हापुस (अल्फांसो) आम से किया गया, जो महाराष्ट्र की पहचान माना जाता है।
मंदिर के व्यवस्थापक हेमंत जाधव के अनुसार, महाराष्ट्र आम उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है और यहां का हापुस आम विश्व स्तर पर अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इसी परंपरा के तहत किसान अपने बागों से आम लाकर अक्षय तृतीया के दिन मां के चरणों में अर्पित करते हैं।
इस महोत्सव में केवल किसान ही नहीं, बल्कि व्यापारी और आम निर्यातक भी शामिल होते हैं। वे विदेशों में आम निर्यात करने से पहले मां के चरणों में प्रार्थना कर अपने व्यापार की सफलता की कामना करते हैं।

मंदिर परिसर में आमों से सजे इस विशेष श्रृंगार को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि अक्षय तृतीया के दिन मां के इस रूप के दर्शन करना अत्यंत शुभ और फलदायी होता है।
हर साल की तरह इस बार भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली और पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। यह परंपरा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अनूठा उदाहरण है।
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