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मुंबई में फर्जी DCP बनकर करोड़ों की ठगी का खुलासा, बाप-बेटे समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा फर्जी डीसीपी बनकर सरकारी नौकरी और तबादले के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के चार आरोपी गिरफ्तार।
मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने खुद को मुंबई पुलिस का डीसीपी बताकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया।

मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-1 की बड़ी कार्रवाई; सरकारी नौकरी, तबादले और मामलों को निपटाने के नाम पर लोगों से ऐंठे लाखों रुपये

मुंबई | मेट्रो सिटी समाचार

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने खुद को मुंबई पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी (DCP) बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने अब तक बाप-बेटे समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड पुलिस अधिकारी बनकर सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने, तबादले कराने और विभिन्न मामलों को निपटाने के नाम पर लोगों से बड़ी रकम वसूलता था।

मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी राज तिलक रोशन ने बताया कि मुख्य आरोपी लोगों का विश्वास जीतने के लिए खुद को मुंबई पुलिस का डीसीपी बताता था। आरोपी ने एक शिकायतकर्ता को सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 15 लाख रुपये की ठगी की।

पुलिस भर्ती के नाम पर भी ठगे 12 लाख रुपये

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने एक अन्य व्यक्ति को पुलिस विभाग में भर्ती कराने का झूठा भरोसा देकर 12 लाख रुपये की ठगी की। इस संबंध में अलग मामला दर्ज किया गया है, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच की यूनिट-3 कर रही है।

पुलिस ने इस मामले में राजेश सिंह चौधरी (46), निवासी जयपुर, राजस्थान को भी गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि आरोपी का नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैला हुआ है और कई लोगों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी किए जाने की आशंका है।

पुलिस यूनिफॉर्म पहनकर जमाता था रौब

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी मुहम्मद गौस इब्राहिम उर्फ राज खातिब बाकायदा पुलिस की वर्दी पहनकर बड़े व्यवसायियों और प्रभावशाली लोगों से मिलता था। वह विभिन्न कार्यक्रमों और पार्टियों में पुलिस अधिकारी बनकर पहुंचता था और सरकारी विभागों में अपनी कथित पहुंच का दावा करते हुए लोगों को प्रभावित करता था।

अंतर्राज्यीय नेटवर्क की जांच जारी

मुंबई पुलिस का कहना है कि गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों का भरोसा जीतकर ठगी को अंजाम देता था। अब तक दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और क्राइम ब्रांच की अलग-अलग टीमें गिरोह के नेटवर्क, अन्य संभावित पीड़ितों और आर्थिक लेन-देन की जांच में जुटी हुई हैं।

पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जी डीसीपी गिरोह से जुड़े और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

VVCMC : “पानी दा रंग वेख के,आंखियाँ चो हंजो रोड़ दे..”

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