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वसई-विरार की बाढ़ पर पालक मंत्री गणेश नाइक का बड़ा बयान, “‘250 मिमी बारिश बादल फटने जैसी स्थिति, ग्लोबल वार्मिंग और अवैध निर्माण भी बड़ी वजह’”

वसई-विरार बाढ़ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते पालघर के पालक मंत्री गणेश नाइक, 250 मिमी बारिश, ग्लोबल वार्मिंग और अवैध निर्माण को बताया कारण।
वसई-विरार बाढ़ पर गणेश नाइक की प्रेस कॉन्फ्रेंस

33 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 20 मिनट ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा, जनता को राहत और जवाबदेही पर अब भी सवाल

वसई-विरार | मेट्रो सिटी समाचार

वसई-विरार में हाल ही में आई भीषण बाढ़, जलजमाव, बिजली संकट और जनजीवन के ठप हो जाने के बाद पालघर जिले के पालक मंत्री एवं वन मंत्री गणेश नाइक ने विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति पर अपना पक्ष रखा। लगभग 33 मिनट चली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरणीय असंतुलन, अवैध निर्माण और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। वहीं पत्रकारों ने प्रशासनिक विफलता, बिजली संकट, जलनिकासी और अवैध निर्माणों को लेकर तीखे सवाल भी पूछे।

ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज को बताया प्रमुख कारण

गणेश नाइक ने कहा कि वसई-विरार में हुई यह त्रासदी केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन का भी परिणाम है। उन्होंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति के एक कथन का हवाला देते हुए कहा कि पूरी दुनिया बढ़ते तापमान और बदलते मौसम चक्र का सामना कर रही है।

उन्होंने विधानसभा में विधायक संतोष दानवे द्वारा उठाए गए बढ़ती गर्मी के मुद्दे का भी उल्लेख किया और कहा कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “ग्लोबल वार्मिंग निश्चित रूप से एक वैश्विक चुनौती है, लेकिन जनता का सवाल यह है कि वसई-विरार से कुछ किलोमीटर दूर स्थित मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और मीरा-भाईंदर जैसे शहरों में उसी स्तर की तबाही क्यों नहीं हुई? यदि कारण केवल जलवायु परिवर्तन है, तो प्रभाव समान क्यों नहीं दिखा? स्थानीय जलनिकासी, शहरी नियोजन और अवैध निर्माणों पर भी उतनी ही गंभीर चर्चा जरूरी है।”

पेट्रोल-डीजल वाहनों, खनिज दोहन और पर्यावरणीय असंतुलन पर चर्चा

वन मंत्री ने कहा कि यूरोप और अमेरिका में प्राकृतिक संसाधनों एवं खनिजों के अत्यधिक दोहन ने पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित किया। उन्होंने पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों को भी बढ़ती गर्मी का एक कारण बताया और कहा कि भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है।

इस दौरान उन्होंने अपनी पुस्तक “Global Warming to Global Cooling” का भी उल्लेख किया।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “जनता का मानना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद सबसे महत्वपूर्ण चर्चा बंद पड़े नालों, जलनिकासी मार्गों, अतिक्रमण और प्रशासनिक तैयारियों पर होनी चाहिए थी। पर्यावरणीय चिंतन आवश्यक है, लेकिन जिन परिवारों के घरों में कई दिनों तक बिजली, पानी और इंटरनेट नहीं था, उनके लिए तत्काल राहत प्राथमिक विषय होना चाहिए था।”

सौर ऊर्जा और वृक्षारोपण पर जोर

गणेश नाइक ने कहा कि पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में वन क्षेत्र को 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 33 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “पालघर जिला और वसई-विरार प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में गिने जाते हैं। नागरिकों का कहना है कि इस क्षेत्र की पहचान प्रकृति ने नहीं, बल्कि अनियोजित विकास, अवैध निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों पर अतिक्रमण और भ्रष्टाचार ने बिगाड़ी है। इसलिए समाधान भी स्थानीय स्तर पर ढूंढना होगा।”

 

अवैध निर्माण और बंद हुए प्राकृतिक नालों का किया उल्लेख

वसई-विरार में जलजमाव के कारणों पर बोलते हुए मंत्री ने स्वीकार किया कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए हैं। कई प्राकृतिक नाले बंद हो गए हैं और जल निकासी के रास्तों पर निर्माण होने से स्थिति गंभीर हुई है।

हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने अगले 15 से 20 दिनों में सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के माध्यम से विस्तृत अध्ययन कराने की बात कही।

💬 पब्लिक ओपिनियन

“वसई-विरार में छोटे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होती रही है, लेकिन यह भी सच है कि कई बड़े निर्माण वर्षों से खड़े हैं। कार्रवाई और पुनः निर्माण का यह चक्र लगातार चलता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे शहर को भुगतना पड़ रहा है। जनता जानना चाहती है कि क्या इस बार केवल सर्वे होगा या वास्तव में ठोस कार्रवाई भी होगी?”

बिजली संकट पर बोले – पानी कम होगा तभी मरम्मत संभव

पत्रकारों द्वारा बिजली आपूर्ति को लेकर सवाल पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि कई स्थानों पर बिजली वितरण की डीपी पानी में डूबी हुई हैं। जब तक जलस्तर कम नहीं होगा, तब तक मरम्मत और बिजली बहाली पूरी तरह संभव नहीं है।

उन्होंने माना कि बच्चे, बुजुर्ग और मरीज कठिन परिस्थितियों में हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से जल्दबाजी में बिजली शुरू नहीं की जा सकती।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “अगर कोई मरीज 15वीं या 20वीं मंजिल पर फंसा हो, लिफ्ट बंद हो, सड़क पर चार-पांच फीट पानी भरा हो और घर में पीने का पानी तक न हो, तो ऐसी स्थिति में आपदा प्रबंधन की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हाईराइज इमारतों को मंजूरी देने वाली व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की क्षमता में इतना बड़ा अंतर क्यों है?”

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का संकेत

वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग की जमीनों पर बने अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा। उन्होंने पुनर्वास और क्लस्टर डेवलपमेंट की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

💬 पब्लिक ओपिनियन

“हर दौरे में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की बात होती है, लेकिन जमीन पर स्थिति बदलती दिखाई नहीं देती। जनता का सवाल है कि यदि वर्षों से यह समस्या सभी के संज्ञान में है, तो अब तक प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पाया?”

‘जिम्मेदार कौन?’ सवाल पर सीधा जवाब नहीं

जब पत्रकारों ने पूछा कि इस त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है, तो मंत्री ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम लेने से परहेज किया। उन्होंने इसे प्राकृतिक आपदा बताते हुए कहा कि राहत और पुनर्वास पर ध्यान देना अधिक जरूरी है।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में इस संकट को मानवजनित बताया गया और बाद में कहा गया कि किसी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। इन दोनों बयानों के बीच का विरोधाभास नागरिकों के मन में कई सवाल छोड़ जाता है।”

सफाई कर्मचारियों की संख्या कम होने पर जांच के निर्देश

पत्रकारों ने बताया कि पहले लगभग 3500 सफाई कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि वर्तमान में संख्या घटकर लगभग 1500 रह गई है। इस पर मंत्री ने जांच की बात कही और कहा कि दोषी पाए जाने पर ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “जनसंख्या बढ़ने के बावजूद यदि सफाई कर्मचारियों की संख्या कम हुई है तो यह आंकड़ा प्रशासन के पास पहले से होना चाहिए। जनता पूछ रही है कि क्या जांच की घोषणा वास्तविक कार्रवाई की शुरुआत है या फिर एक और औपचारिक प्रक्रिया?”

आपदा प्रबंधन पर स्वीकार की कमी

गणेश नाइक ने माना कि आपदा की गंभीरता के सामने व्यवस्थाएं अपर्याप्त साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में आपदा प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन इमारतों में पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “यदि सुविधाओं के अभाव वाली इमारतों को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी, तो यह अनुमति किसने दी? जनता का सवाल है कि जिम्मेदारी तय किए बिना भविष्य की योजनाएं कितनी प्रभावी साबित होंगी?”

250 मिमी बारिश बादल फटने जैसी स्थिति’

मंत्री ने कहा कि एक दिन में लगभग 250 मिमी बारिश होना असामान्य है और इसे बादल फटने जैसी स्थिति माना जा सकता है। उन्होंने इसे प्राकृतिक आपदा बताया और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए नई जलनिकासी प्रणाली और भूमिगत बिजली व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

💬 पब्लिक ओपिनियन

 “मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और मीरा-भाईंदर में भी भारी बारिश हुई, लेकिन वसई-विरार जैसी व्यापक तबाही देखने को नहीं मिली। ऐसे में नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या केवल बारिश जिम्मेदार है या फिर वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक और नियोजन संबंधी कमियां भी उतनी ही बड़ी वजह हैं?”

कुल मिलाकर…

वसई-विरार की बाढ़ पर आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पालक मंत्री गणेश नाइक ने ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, अवैध निर्माण और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि अवैध निर्माण, बंद नाले और कमजोर व्यवस्थाएं समस्या का हिस्सा हैं, वहीं इसे प्राकृतिक आपदा का स्वरूप भी बताया।

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भी कई मूलभूत प्रश्न अनुत्तरित रह गए—जिम्मेदारी किसकी है, जवाबदेही कौन तय करेगा, और सबसे महत्वपूर्ण, क्या भविष्य में वसई-विरार के नागरिकों को ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं झेलनी पड़ेगी?

यही सवाल आज वसई-विरार की जनता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पूछ रही है।

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