मुंबई/वसई: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में वसई विधानसभा की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने वसई-विरार में हर वर्ष उत्पन्न होने वाली बाढ़ की समस्या, नाला सफाई में कथित भ्रष्टाचार और वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) के कार्यों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वसई-विरार में कुछ घंटों की बारिश के बाद ही शहर जलमग्न हो जाता है, जिससे नागरिकों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होता है।
विधानसभा में लक्षवेधी सूचना के माध्यम से बोलते हुए विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि वसई-विरार के लोगों के लिए अब बारिश राहत नहीं, बल्कि चिंता का कारण बन गई है। उन्होंने कहा कि जहां अन्य क्षेत्रों में कई दिनों की बारिश के बाद बाढ़ आती है, वहीं वसई-विरार में महज चार घंटे की बारिश में सड़कें नदी में बदल जाती हैं, वाहन बह जाते हैं और लोगों का सामान्य जीवन ठप हो जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वसई-विरार महानगरपालिका की स्थापना के 16 वर्ष बाद भी शहर में एकीकृत भूमिगत सीवरेज प्रणाली (Underground Sewerage System) और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया। इसके अलावा, NEERI द्वारा तैयार किए गए बाढ़ नियंत्रण संबंधी अध्ययन पर भी अब तक अमल नहीं किया गया है।
विधायक ने कहा कि आज वसई की हर मां को बारिश शुरू होते ही अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगती है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति किसी भी प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विधायक ने सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें
- चार वर्षों से रिक्त शहर अभियंता (City Engineer) के पद पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की जाए तथा वर्तमान प्रभारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- नाला सफाई में कथित करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की एसीबी (ACB) से जांच कराई जाए।
- NEERI की सभी सिफारिशों को तत्काल लागू कर बाढ़ नियंत्रण के लिए अलग कार्ययोजना बनाई जाए।
- वसई क्षेत्र के लगभग 3,000 प्राकृतिक होल्डिंग पॉन्ड (बावखल) के संरक्षण के लिए विशेष नीति लागू की जाए।
महानगरपालिका के दावों पर उठाए सवाल
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने महानगरपालिका द्वारा सरकार को दिए गए जवाबों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सड़कों की ऊंचाई बढ़ाने, फ्लड गेट लगाने और बाढ़ नियंत्रण कार्य पूरे होने का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती। उन्होंने सदन में कहा कि यदि फ्लड गेट लगाए गए हैं तो उनका प्रमाण और तस्वीरें सार्वजनिक की जाएं।
नाला सफाई में कथित आर्थिक अनियमितता का मुद्दा
उन्होंने नाला सफाई के कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, जहां मीरा-भाईंदर महानगरपालिका में मशीनरी का 10 घंटे का किराया लगभग ₹8,000 है, वहीं वसई-विरार महानगरपालिका में एक घंटे का खर्च ही ₹8,000 दर्शाया गया है। उन्होंने इस अंतर की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
विधायक ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में कथित अनियमितताएं हुईं, वही अधिकारी वर्तमान में नगर विकास विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
सरकार ने दिए ये आश्वासन
नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने सदन में जवाब देते हुए विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीर बताते हुए कहा कि:
- 15 दिनों के भीतर वसई-विरार महानगरपालिका में सक्षम शहर अभियंता की नियुक्ति की जाएगी।
- नाला सफाई कार्यों की आठ दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
- यदि अनियमितताएं पाई गईं तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
- बाढ़ नियंत्रण के लिए अलग कार्ययोजना तैयार कर विभिन्न सरकारी योजनाओं से आवश्यक धन उपलब्ध कराया जाएगा।
इस दौरान वरिष्ठ विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी वसई-विरार में बाढ़ की समस्या को गंभीर बताते हुए नाला सफाई मामले की जांच रिपोर्ट आठ दिनों के भीतर सदन में पेश करने की मांग की।
चर्चा के अंत में विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि वसई-विरार के नागरिकों की सुरक्षा और शहर को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेंगी.
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