मुंबई: मुंबई को रोज मिलने वाले पानी में लगभग 550 मिलियन लीटर की कमी है। इसी अंतर को भरने के लिए BMC मनोरी में शहर का पहला समुद्री जल शोधन यानी desalination plant बनाने जा रही है। योजना बड़ी है—पहले चरण में रोज 200 मिलियन लीटर समुद्री पानी को पीने योग्य बनाया जाएगा और भविष्य में क्षमता 400 MLD तक बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जिस समुद्र से शहर को पानी देने की तैयारी है, उसी समुद्र पर पीढ़ियों से निर्भर मनोरी, गोराई और उत्तन के मछुआरे परियोजना के विरोध में खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सवाल सिर्फ एक निर्माण परियोजना का नहीं, बल्कि मछली पकड़ने, खेती, स्थानीय कारोबार और समुद्री जैवविविधता के भविष्य का है। दूसरी ओर BMC का दावा है कि परियोजना में आधुनिक reverse osmosis तकनीक, नियंत्रित जल-प्रवाह और समुद्र में काफी दूर तक जाने वाली पाइपलाइन इस्तेमाल होगी, जिससे समुद्री जीवन पर असर सीमित रहेगा।

₹4,077 करोड़ का प्लांट, दिसंबर 2029 का लक्ष्य

मनोरी की पहाड़ी पर करीब 29 हेक्टेयर जमीन में बनने वाले प्लांट की अनुमानित लागत ₹4,077 करोड़ है। दिसंबर 2025 में IDE Technologies और GVPR Engineers के संयुक्त उपक्रम को निर्माण तथा 20 वर्ष के संचालन और रखरखाव का ठेका दिया गया। पहले चरण को दिसंबर 2029 तक शुरू करने का लक्ष्य है। BMC का अनुमान है कि 200 MLD क्षमता से करीब 15 लाख लोगों की रोज की पानी जरूरत पूरी हो सकेगी।

समुद्र से लिया गया पानी कई स्तर की छनाई और दो चरणों वाली reverse osmosis प्रक्रिया से गुजरेगा। शुद्ध पानी को 7.2 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए चारकोप और कांदिवली के महावीर नगर क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना है। इस सुरंग के लिए अलग से ₹2,241 करोड़ का ठेका दिया गया है।

मछुआरों की चिंता: खारा अपशिष्ट कहां जाएगा?

समुद्री पानी से नमक निकालने के बाद अधिक खारापन वाला पानी बचता है, जिसे brine कहा जाता है। प्रस्ताव के मुताबिक इसे neutralise कर समुद्र में वापस छोड़ा जाएगा। मछुआरों को आशंका है कि लगातार अधिक खारा पानी छोड़े जाने से तटीय इलाके में मछलियों के प्रजनन, छोटी मछलियों, अंडों और चट्टानों के आसपास मिलने वाले केकड़े तथा लॉबस्टर जैसे जीव प्रभावित हो सकते हैं।

मनोरी–गोराई–उत्तन पट्टी के हजारों परिवार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मछली व्यवसाय पर निर्भर हैं। यहां सिर्फ नाव चलाने वाले मछुआरे नहीं, बल्कि मछली बेचने वाली महिलाएं, बर्फ आपूर्तिकर्ता, ट्रांसपोर्टर, व्यापारी, रेस्तरां और निर्यात से जुड़े लोग भी इसी अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। आसपास के किसानों को आशंका है कि समुद्र और भूजल में खारापन बढ़ा तो खेती भी प्रभावित हो सकती है।

BMC का जवाब: समुद्री जीवों को बचाने के इंतजाम

BMC अधिकारियों का कहना है कि पानी खींचने वाले intake head को low-tide level से नीचे रखा जाएगा और अंदर जाने वाले पानी की गति 0.15 मीटर प्रति सेकंड से कम होगी। 50 मिलीमीटर की जाली समुद्री जीवों को पाइप में प्रवेश करने से रोकने के लिए लगाई जाएगी। खारा अपशिष्ट किनारे से करीब 2.4 किलोमीटर दूर 15 diffusers वाली पाइप से फैलाकर छोड़ा जाएगा।

निगम का दावा है कि reverse osmosis से निकलने वाले brine में जहरीले रसायन या भारी धातुएं नहीं होंगी और उसका तापमान आसपास के समुद्र से लगभग समान रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक outlet तट से काफी दूर होने के कारण मछलियों के breeding zone पर प्रत्यक्ष असर नहीं होना चाहिए। BMC ने यह भी कहा है कि वह स्थानीय समुदाय के साथ बातचीत के लिए तैयार है।

समुद्री पानी से पहले पाइपलाइन की लीकेज रोकने की मांग

स्थानीय लोगों का दूसरा सवाल शहर की मौजूदा जल व्यवस्था से जुड़ा है। उनका तर्क है कि पानी की चोरी, पुरानी पाइपलाइन और लीकेज में बड़ी मात्रा बर्बाद होती है; इसलिए महंगे समुद्री जल प्रोजेक्ट से पहले इन नुकसानों को कम करना चाहिए। मुंबई की जल सुरक्षा पर बहस अब केवल नई क्षमता जोड़ने की नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन करने की भी है।

MCS ने हाल ही में मुंबई की पेयजल गुणवत्ता से जुड़ी BMC की सलाह और MMR की 2051 तक की जल सुरक्षा योजना की जानकारी दी थी। मनोरी प्लांट इसी बड़ी चुनौती का हिस्सा है, लेकिन परियोजना का भविष्य इस बात पर भी निर्भर करेगा कि पर्यावरणीय आशंकाओं और मछुआरों की आजीविका से जुड़े सवालों का जवाब कितनी पारदर्शिता से दिया जाता है।