मुंबई: विले पार्ले पश्चिम में एक BMW कार से पहले दूसरी कार और स्कूटर को टक्कर लगने तथा बाद में ड्यूटी पर मौजूद ट्रैफिक कांस्टेबल की ओर गाड़ी बढ़ाने के आरोप में गिरफ्तार महिला को बांद्रा अदालत से जमानत मिल गई है। जुहू पुलिस ने महिला के खिलाफ सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने, लापरवाही से जान जोखिम में डालने, धमकी देने और खतरनाक ड्राइविंग से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार घटना एन. एस. रोड पर प्रतीक्षा बंगले के पास रात करीब 8:30 बजे हुई। आरोप है कि BMW ने खड़ी WagonR को टक्कर मारी और वह आगे एक स्कूटर से जा भिड़ी। हादसे के कारण सड़क पर भीड़ और ट्रैफिक जमा होने लगा। विले पार्ले ट्रैफिक डिवीजन के कांस्टेबल प्रशांत हाके वहां ड्यूटी पर थे और उन्होंने संबंधित वाहन चालकों को गाड़ियां किनारे करने के लिए कहा।

पुलिस का आरोप: कांस्टेबल के सामने बढ़ाई कार

पुलिस का दावा है कि BMW चला रही महिला ने कांस्टेबल से बहस की और उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। आरोप है कि जब कांस्टेबल कार के सामने खड़े थे, तब महिला ने वाहन शुरू कर उनकी ओर बढ़ाया। कांस्टेबल ने समय रहते हटकर खुद को बचाया, जिसके बाद कार JVPD जंक्शन की दिशा में निकल गई।

जुहू पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 125 और 351 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर यह जांचने के लिए मेडिकल परीक्षण भी कराया कि हादसे के समय वह शराब के प्रभाव में तो नहीं थी। इसके बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से नकद जमानत पर रिहा कर दिया गया। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है; मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

महिला चालक ने बताया अलग घटनाक्रम

महिला चालक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस के आरोपों से अलग बात कही है। उसका दावा है कि स्कूटर सवार महिला उसकी कार की ओर आई थी और टक्कर BMW से नहीं, WagonR से लगी। महिला का यह भी कहना है कि उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के आने का इंतजार किया, लेकिन मौके पर भीड़ बढ़ने और अकेले होने के कारण वहां से चली गई।

फिलहाल ये दोनों अलग-अलग पक्ष हैं। दुर्घटना कैसे हुई, कांस्टेबल और कार के बीच वास्तविक दूरी क्या थी तथा वाहन जानबूझकर उनकी ओर बढ़ाया गया या नहीं—इन सवालों का उत्तर सीसीटीवी, मोबाइल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों और वाहनों की तकनीकी जांच से स्पष्ट होगा। अदालत में आरोप साबित होने तक महिला को दोषी नहीं माना जा सकता।

व्यस्त इलाके में कुछ मिनटों का विवाद बना पुलिस केस

विले पार्ले और जुहू को जोड़ने वाला यह इलाका शाम के समय काफी व्यस्त रहता है। छोटी टक्कर के बाद वाहन सड़क के बीच रुकने से जाम तेजी से बढ़ सकता है और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। पुलिसकर्मी द्वारा वाहन किनारे कराने के निर्देश का पालन न करना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। दूसरी ओर किसी दुर्घटना में चालक को भीड़ से खतरा महसूस हो तो उसे मौके से भागने के बजाय पुलिस कंट्रोल रूम या निकटतम पुलिस स्टेशन से तत्काल मदद मांगनी चाहिए।

मुंबई में महंगी कार से जुड़े हादसों के बाद जवाबदेही का सवाल पहले भी उठता रहा है। MCS ने इससे पहले बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर BMW हादसे और मुंबई के ट्रैफिक बदलावों पर रिपोर्ट की है। मौजूदा मामले में जुहू पुलिस के सामने चुनौती दोनों पक्षों के दावों को उपलब्ध वीडियो और तकनीकी सबूतों से मिलाने की होगी।

अब आगे क्या होगा?

जांच अधिकारी आसपास के सीसीटीवी फुटेज, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट और मौके पर मौजूद लोगों के बयान देख सकते हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। फिलहाल महिला जमानत पर है और मामला जांच के स्तर पर है।