पुणे, 8 नवंबर 2026: पुणे के सहकारनगर पुलिस स्टेशन परिसर में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप एक पुलिस निरीक्षक पर है, जिसके खिलाफ महाराष्ट्र प्रोहिबिशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने विभागीय जांच भी शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी में काम करता है। वह पुणे-सातारा रोड पर PMPML बस से यात्रा कर रहा था, तभी एक निजी लग्जरी बस सार्वजनिक परिवहन की बस से कथित तौर पर छू गई। इसके बाद शिकायतकर्ता और निजी बस के चालक के बीच विवाद हुआ तथा चालक पर बस में चढ़कर शिकायतकर्ता से मारपीट करने का आरोप लगा।

शिकायत देने पहुंचा तो थाने में दूसरा विवाद

पहली घटना की शिकायत देने के लिए व्यक्ति सहकारनगर पुलिस स्टेशन पहुंचा था। आरोप है कि वहां मौजूद निरीक्षक ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराने को लेकर उससे सवाल किए और फिर उसे थप्पड़ मार दिया। संबंधित अधिकारी के नशे में होने का भी आरोप लगाया गया है।

पुलिस ने निजी बस चालक के खिलाफ शुरुआती सड़क विवाद को लेकर असंज्ञेय शिकायत दर्ज की है। निरीक्षक के कथित व्यवहार के मामले में अलग कार्रवाई की गई है। दोनों घटनाओं की कानूनी स्थिति और लगाए गए आरोप अलग-अलग हैं।

प्रोहिबिशन एक्ट के तहत केस

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि निरीक्षक के खिलाफ महाराष्ट्र प्रोहिबिशन एक्ट के प्रावधानों में मामला दर्ज हुआ है। हालांकि संबंधित अधिकारी की मेडिकल जांच हुई या नहीं और नशे की स्थिति चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए नशे में होने की बात फिलहाल आरोप और जांच का हिस्सा है।

बताया गया है कि निरीक्षक का शनिवार से पांच दिन का अवकाश शुरू होना था। ऐसे में वह थाने में क्यों मौजूद था और घटनाक्रम के समय उसकी ड्यूटी की स्थिति क्या थी, यह भी विभागीय जांच में देखा जाएगा।

ACP की निगरानी में विभागीय जांच

मामले की जांच एक सहायक पुलिस आयुक्त को सौंपी गई है। जांच में स्टेशन डायरी, ड्यूटी रिकॉर्ड, परिसर के CCTV फुटेज, शिकायतकर्ता और मौजूद कर्मचारियों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई तय होगी।

केवल FIR या विभागीय जांच शुरू होना दोष सिद्ध होना नहीं है। निरीक्षक को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और आरोपों का मूल्यांकन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। शिकायतकर्ता के साथ कथित मारपीट के दावे पर भी जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है।

थाने में शिकायतकर्ता की सुरक्षा का सवाल

पुलिस स्टेशन नागरिकों के लिए शिकायत और सहायता का पहला केंद्र होता है। यदि परिसर में ही शिकायतकर्ता के साथ दुर्व्यवहार का आरोप सामने आए, तो यह संस्थागत भरोसे से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। जांच का समयबद्ध और पारदर्शी निष्कर्ष दोनों पक्षों के लिए जरूरी है।

पुणे में पुलिस और परिवहन नियमों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई पहले भी चर्चा में रही है। हाल में बाइक-टैक्सी ऐप को लेकर पुणे पुलिस की कार्रवाई पर भी कानूनी और नियामकीय सवाल उठे थे। सहकारनगर मामले में विभागीय जांच पूरी होने और वरिष्ठ अधिकारियों की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।