Vasai सुरक्षा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ( Suraksha Smart City Project) में मजदूरों ने काम बंद कर खोला मोर्चा; कंपनी मैनेजमेंट ने कैमरे पर जवाब देने से किया इनकार, श्रम कानूनों और मजदूरों की सुविधाओं को लेकर उठे गंभीर सवाल
मेट्रो सिटी समाचार | एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट एवं दस्तावेज आधारित पड़ताल
वसई पूर्व | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026: वसई पूर्व के मधुबन टाउनशिप के आगे स्थित सुरक्षा स्मार्ट सिटी (Suraksha Smart City) प्रोजेक्ट में शुक्रवार 16 Oct 2026 सुबह करीब 8 बजे से मजदूरों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, जो रिपोर्ट तैयार किए जाने तक जारी था। मजदूरों का आरोप है कि उनसे रोजाना करीब 12 घंटे काम करवाया जाता है, लेकिन बदले में कुछ कर्मचारियों को महज ₹15,000 मासिक पगार मिलती है। इसके अलावा खराब खाना, भोजन में कीड़े मिलने, कई महीनों से रोटी नहीं दिए जाने और जरूरी स्वास्थ्य-सुरक्षा सुविधाओं की कमी जैसे गंभीर आरोप भी मजदूरों ने लगाए हैं।
इन शिकायतों को लेकर मजदूरों ने काम बंद कर दिया और सड़क पर उतरकर कंपनी मैनेजमेंट के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सुबह करीब 8 बजे से 9:30 बजे के बीच सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद कुछ समय के लिए सड़क से चक्का जाम हटाया गया, लेकिन मजदूरों का विरोध समाप्त नहीं हुआ।
मेट्रो सिटी समाचार की ग्राउंड रिपोर्टिंग में सामने आई इन शिकायतों ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। करोड़ों रुपये की रियल एस्टेट परियोजनाओं में निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों के काम के घंटे, उनकी सैलरी, भोजन और स्वास्थ्य-सुरक्षा की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?
12 घंटे ड्यूटी और महज ₹15 हजार पगार? मजदूरों ने उठाए सवाल
मेट्रो सिटी समाचार से बातचीत करते हुए प्रदर्शन में शामिल कुछ मजदूरों ने बताया कि उनसे साइट पर रोजाना लगभग 12 घंटे काम करवाया जाता है और इसके बदले उन्हें करीब ₹15,000 मासिक पगार मिलती है।
हालांकि, यह जानकारी संबंधित मजदूरों ने अपनी व्यक्तिगत नौकरी और भुगतान के आधार पर दी है। इसलिए इसे प्रोजेक्ट पर काम करने वाले सभी मजदूरों का वेतन या ड्यूटी टाइम नहीं माना जा सकता।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि मजदूरों के आरोप सही हैं तो क्या उन्हें अतिरिक्त काम के बदले निर्धारित दर से ओवरटाइम दिया जा रहा है?
केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी Occupational Safety, Health and Working Conditions Code संबंधी स्पष्टीकरण के अनुसार सामान्य कार्य अवधि का मानक 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह है। निर्धारित समय से अधिक काम के लिए लागू प्रावधानों के तहत सामान्य वेतन की दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान का अधिकार है।
हालांकि, किसी कर्मचारी के 12 घंटे साइट पर मौजूद रहने और लगातार 12 घंटे वास्तविक काम करने में कानूनी अंतर हो सकता है। इसलिए ड्यूटी रजिस्टर, ब्रेक टाइम, हाजिरी और वेतन रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
खाने में कीड़े मिलने का आरोप, मोबाइल पर दिखाई तस्वीरें
प्रदर्शनकारी मजदूरों ने साइट पर दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत की।
कुछ मजदूरों ने अपने मोबाइल फोन में तस्वीरें दिखाते हुए दावा किया कि उनके भोजन में कीड़े मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद खाने की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें मुख्य रूप से दाल और चावल दिया जा रहा है, जबकि पिछले कुछ महीनों से रोटी नहीं मिल रही है।
मजदूरों की ओर से दिखाई गई तस्वीरों की स्वतंत्र फूड टेस्टिंग या अधिकृत जांच अभी नहीं हुई है। इसलिए खाने में कीड़े मिलने की शिकायत को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
लेकिन इन आरोपों के सामने आने के बाद सवाल उठता है कि प्रोजेक्ट में भोजन कौन सप्लाई करता है? क्या खाना कंपनी की अपनी कैंटीन में तैयार होता है या इसकी जिम्मेदारी किसी बाहरी कॉन्ट्रैक्टर को सौंपी गई है? खाने की गुणवत्ता की जांच कौन करता है और शिकायतों का रिकॉर्ड कहां रखा जाता है?
चार साल से काम करने वाले मजदूरों की भी शिकायत
कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे लगभग चार साल से इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, करीब तीन महीने पहले भी मैनेजमेंट को इन समस्याओं की जानकारी दी गई थी, लेकिन आश्वासन के अलावा कोई ठोस समाधान नहीं मिला।
मजदूरों ने ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य-सुरक्षा संबंधी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की है।
हालांकि, ग्रेच्युटी की पात्रता कर्मचारी की सेवा अवधि, नियुक्ति की स्थिति और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करती है। इसलिए चार साल से काम करने का दावा अपने आप यह साबित नहीं करता कि संबंधित मजदूर की ग्रेच्युटी का भुगतान बकाया है।
इसके लिए संबंधित मजदूरों के नियुक्ति पत्र, नौकरी की अवधि, कॉन्ट्रैक्टर का विवरण और अन्य रोजगार रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
मेट्रो सिटी समाचार की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
मजदूरों के प्रदर्शन और सड़क पर ट्रैफिक प्रभावित होने की जानकारी मेट्रो सिटी समाचार ने मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस के अधिकारियों तक पहुंचाई।
इसके बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और साइट मैनेजमेंट से बातचीत की।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मैनेजमेंट ने मजदूरों के साथ बातचीत जारी होने की बात कही। हालांकि, मजदूरों की मांगों पर क्या निर्णय हुआ और समस्याओं के समाधान की कोई समयसीमा तय की गई या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
मीडिया के कैमरे पर जवाब देने से मैनेजमेंट का इनकार
मेट्रो सिटी समाचार ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर मौजूद मैनेजमेंट प्रतिनिधियों से मजदूरों के आरोपों को लेकर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की।
लेकिन मौके पर मौजूद प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम की वीडियो फुटेज मेट्रो सिटी समाचार के पास मौजूद है।
मैनेजमेंट का विस्तृत पक्ष अभी प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में मजदूरों के आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी। प्रोजेक्ट के संबंधित डेवलपर, नियुक्त कॉन्ट्रैक्टर और श्रम विभाग की जांच के बाद ही जिम्मेदारियों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
सुरक्षा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट किस कंपनी का है? दस्तावेजों से सामने आई जानकारी
मेट्रो सिटी समाचार ने मजदूरों की शिकायतों के साथ सुरक्षा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंपनी और MahaRERA संबंधी जानकारी की भी पड़ताल की।
प्रोजेक्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सुरक्षा स्मार्ट सिटी वसई पूर्व के राजावली इलाके में विकसित की जा रही लगभग 362 एकड़ की मेगा टाउनशिप है। इसमें 23 मंजिला टावर, Precast Construction Technology और 100 से अधिक प्रस्तावित सुविधाओं का उल्लेख किया गया है।
MahaRERA से संबंधित सार्वजनिक रिकॉर्ड में Conceptual Advisory Services LLP का नाम प्रोजेक्ट के प्रमोटर/डेवलपर के रूप में दर्ज है। कंपनी की पहचान और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक कॉर्पोरेट रिकॉर्ड में उपलब्ध है।
कंपनी और प्रोजेक्ट की प्रमुख जानकारी
| विवरण | उपलब्ध रिकॉर्ड |
|---|---|
| प्रोजेक्ट का नाम | Suraksha Smart City |
| स्थान | राजावली, वसई पूर्व, पालघर |
| डेवलपर/प्रमोटर | Conceptual Advisory Services LLP |
| कंपनी का LLPIN | AAL-7462 |
| कंपनी की स्थापना | 18 जनवरी 2018 |
| रजिस्टर्ड ऑफिस | सुरक्षा स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेट ऑफिस, राजावली, वसई पूर्व |
| प्रस्तावित टाउनशिप | लगभग 362 एकड़ |
| निर्माण तकनीक | Precast Technology |
| Phase I RERA | P99000023396 |
| Phase II RERA | PM1242022601990 |
| Phase III RERA | P99000081050 |
संबंधित स्रोत: कंपनी रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, डेवलपर की आधिकारिक वेबसाइट और MahaRERA डेटा।
उपलब्ध कंपनी रिकॉर्ड और अलग-अलग RERA फाइलिंग में भूषण प्रकाशभाई मेहता, विवेक मित्तल तथा राज जयसिंह कारिया जैसे नाम संबंधित भूमिकाओं में सामने आते हैं। हालांकि, अलग-अलग तारीखों की फाइलिंग में पदनाम और साझेदारी संबंधी जानकारी अलग है। इसलिए वर्तमान साझेदारों की अंतिम सूची MCA के नवीनतम रिकॉर्ड से सत्यापित करना जरूरी है।
महत्वपूर्ण बात: डेवलपर का नाम सामने आने से यह साबित नहीं होता कि प्रत्येक प्रदर्शनकारी मजदूर सीधे उसी कंपनी का कर्मचारी है। निर्माण परियोजनाओं में मुख्य डेवलपर के अलावा सिविल कॉन्ट्रैक्टर, लेबर सप्लाई एजेंसी, सब-कॉन्ट्रैक्टर और अन्य एजेंसियां भी कार्यरत हो सकती हैं।
सुरक्षा स्मार्ट सिटी में प्रदर्शन कर रहे मजदूर किस एजेंसी के माध्यम से नियुक्त हुए हैं, उन्हें वेतन कौन देता है और भोजन व सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास है, इसकी अधिकृत सूची फिलहाल उपलब्ध नहीं हो सकी है।
प्रोजेक्ट को कितनी मंजिलों की मंजूरी? CC और RERA रिकॉर्ड में क्या मिला?
सुरक्षा स्मार्ट सिटी के अलग-अलग चरणों के लिए MahaRERA रजिस्ट्रेशन मौजूद हैं।
सार्वजनिक RERA डेटा के अनुसार, Phase I का रजिस्ट्रेशन दिसंबर 2019 का है और संशोधित प्रस्तावित पूर्णता तारीख 31 दिसंबर 2026 दर्शाई गई है। Phase III में तीन बिल्डिंग रिकॉर्ड के अंतर्गत 24 मंजिलों की स्वीकृति का विवरण उपलब्ध है।
Phase I तथा Phase III के RERA दस्तावेजों में Commencement Certificate से संबंधित फाइलों के अपलोड होने का रिकॉर्ड भी दिखाई देता है। लेकिन केवल दस्तावेज अपलोड होने की जानकारी से किसी विशेष बिल्डिंग की वर्तमान मंजिलवार निर्माण अनुमति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
इस मामले में वसई-विरार महानगरपालिका से तीन जानकारियां महत्वपूर्ण हैं—प्रत्येक Phase का CC नंबर और जारी होने की तारीख, स्वीकृत निर्माण क्षेत्र तथा प्रत्येक बिल्डिंग की मंजूर मंजिलों का अद्यतन विवरण।
अब तक उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर यह कहने का कोई प्रमाण नहीं मिला कि प्रोजेक्ट बिना CC के निर्माण कर रहा है। इसी तरह प्रत्येक Phase के संपूर्ण अद्यतन CC विवरण की पुष्टि भी नहीं हो सकी है।
आखिर ₹15,000 वेतन महाराष्ट्र के Minimum Wages के हिसाब से सही है या नहीं?
महाराष्ट्र में न्यूनतम वेतन निर्धारित करते समय काम की श्रेणी, क्षेत्र, लागू Scheduled Employment और समय-समय पर जारी सरकारी अधिसूचनाओं का महत्व होता है।
1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 की अवधि के लिए प्रकाशित महाराष्ट्र की Shops and Commercial Establishments श्रेणी की Zone-I संदर्भ दरों में अकुशल कामगारों के लिए ₹14,155, अर्धकुशल के लिए ₹14,990 और कुशल कामगारों के लिए ₹15,766 मासिक राशि दिखाई गई है।
लेकिन ये दरें सीधे सुरक्षा स्मार्ट सिटी के निर्माण मजदूरों पर लागू मान लेना सही नहीं होगा। निर्माण कार्य के लिए संबंधित श्रम श्रेणी, अधिसूचना और अन्य लागू प्रावधान अलग से सत्यापित करने होंगे।
इसलिए केवल ₹15,000 पगार के आधार पर न्यूनतम वेतन कानून के उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इसके विपरीत, यदि ₹15,000 मासिक भुगतान के बदले मजदूरों से नियमित रूप से आठ घंटे से अधिक वास्तविक काम करवाया जा रहा है और नियमानुसार ओवरटाइम नहीं दिया जा रहा, तो यह गंभीर जांच का विषय बनता है।
श्रम मंत्रालय के अनुसार, लागू प्रावधानों में निर्धारित कार्य अवधि से अधिक काम करने पर दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान का अधिकार है।
ऐसे में संबंधित मजदूरों के पिछले तीन से छह महीनों के Attendance Register, Wage Register, Overtime Register, बैंक भुगतान और सैलरी स्लिप की जांच से स्पष्ट हो सकता है कि उनका भुगतान नियमानुसार हुआ है या नहीं।
मजदूरों के भोजन, पानी और स्वास्थ्य-सुरक्षा के लिए क्या नियम हैं?
निर्माण मजदूरों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार और अन्य जरूरी Welfare Facilities सुनिश्चित करने के कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
Building and Other Construction Workers संबंधी कानून और नियमों में पेयजल, शौचालय, अस्थायी आवास, स्वास्थ्य-सुरक्षा तथा कैंटीन की स्वच्छता से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। लागू कैंटीन प्रावधानों में भोजन की गुणवत्ता, सफाई और मजदूरों की सामान्य खानपान संबंधी आदतों का भी ध्यान रखा गया है।
हालांकि, प्रत्येक साइट पर भोजन मुफ्त देना या रोज रोटी उपलब्ध कराना अपने आप सार्वभौमिक कानूनी बाध्यता नहीं है। यह लागू नियमों, कॉन्ट्रैक्ट और साइट की व्यवस्था पर निर्भर करता है।
इसके बावजूद, यदि कंपनी या कॉन्ट्रैक्टर मजदूरों को भोजन उपलब्ध करा रहा है, तो उसकी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा की शिकायतों की जांच जरूरी है।
इस मामले में कैंटीन या फूड सप्लाई कॉन्ट्रैक्टर की पहचान, भोजन तैयार करने की व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा संबंधी अनुमति, साफ पानी, किचन निरीक्षण और शिकायत रजिस्टर की जांच होनी चाहिए।
लेबर कमिश्नर और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी क्या है?
महाराष्ट्र श्रम विभाग के अधीन Labour Commissionerate की व्यवस्थाओं में निर्माण प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन, कॉन्ट्रैक्टर लाइसेंस, श्रमिकों की सेवा शर्तों और लागू श्रम नियमों के अनुपालन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
सुरक्षा स्मार्ट सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट में संबंधित सक्षम श्रम अधिकारियों से अपेक्षित है कि मजदूरों की शिकायत मिलने पर ड्यूटी और भुगतान रिकॉर्ड, कॉन्ट्रैक्टर की वैधता, मूलभूत सुविधाओं और कार्यस्थल की सुरक्षा की जांच करें।
भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत की पुष्टि के लिए संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण की जांच और आवश्यक होने पर खाद्य नमूनों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
मेट्रो सिटी समाचार की पड़ताल में यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि सुरक्षा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर श्रम विभाग का पिछला निरीक्षण कब हुआ, कितनी कमियां दर्ज की गई थीं और कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं।
इन सवालों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
सुरक्षा स्मार्ट सिटी में कुल कितने मजदूर कार्यरत हैं?
यह इस पड़ताल का महत्वपूर्ण लेकिन अब तक अनुत्तरित सवाल है।
प्रोजेक्ट के सार्वजनिक RERA और कंपनी रिकॉर्ड से टाउनशिप का आकार, अलग-अलग Phases तथा निर्माण संबंधी कुछ जानकारी सामने आती है। लेकिन 16 अक्टूबर 2026 को पूरी साइट पर कुल कितने मजदूर कार्यरत थे, कितने स्थायी और कितने कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी थे, इसका सत्यापित आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं हुआ।
इसका वास्तविक विवरण मुख्य डेवलपर, संबंधित लेबर कॉन्ट्रैक्टर, साइट Attendance Register और श्रम विभाग के रिकॉर्ड से सामने आ सकता है।
साथ ही यह भी पता लगाना आवश्यक है कि कितने मजदूर महाराष्ट्र Building and Other Construction Workers Welfare Board में पंजीकृत हैं तथा कितने कर्मचारियों को लागू सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
अब कंपनी और प्रशासन से इन सवालों के जवाब जरूरी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सुरक्षा स्मार्ट सिटी के डेवलपर, साइट मैनेजमेंट और संबंधित विभागों से कई सवालों के जवाब अपेक्षित हैं।
- साइट पर कुल कितने मजदूर हैं और किन-किन कॉन्ट्रैक्टरों के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं?
- मजदूरों की सामान्य ड्यूटी कितने घंटे की है और अतिरिक्त काम के लिए कितना ओवरटाइम दिया जाता है?
- अलग-अलग श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम और वास्तविक वेतन कितना है?
- भोजन की सप्लाई कौन करता है और खराब खाने की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
- मजदूरों की सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सुविधाओं की आखिरी जांच कब हुई?
- श्रम विभाग ने पिछले तीन वर्षों में इस साइट के कितने निरीक्षण किए और क्या रिपोर्ट तैयार की?
- मजदूरों की शिकायतों के समाधान के लिए मैनेजमेंट ने क्या लिखित आश्वासन दिया है?
क्या मजदूरों को मिलेगा न्याय?
सुरक्षा स्मार्ट सिटी में शुक्रवार को सामने आया विरोध प्रदर्शन सिर्फ काम बंद करने या सड़क पर चक्का जाम का मामला नहीं है। यह निर्माण मजदूरों के काम के घंटे, वेतन, खानपान और मूलभूत सुविधाओं की जवाबदेही से भी जुड़ा है।
एक तरफ इस विशाल टाउनशिप में हजारों घरों का निर्माण प्रस्तावित है, तो दूसरी तरफ इसे बनाने वाले कुछ मजदूर अपनी बुनियादी जरूरतों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन करने को मजबूर होने का दावा कर रहे हैं।
अब जरूरी है कि मजदूरों के आरोपों की निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच हो। यदि कहीं श्रम कानूनों या निर्धारित सुविधाओं का उल्लंघन मिलता है, तो जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
वहीं, कंपनी मैनेजमेंट और संबंधित कॉन्ट्रैक्टरों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
फिलहाल मजदूरों का प्रदर्शन जारी होने की जानकारी है और उनकी मांगों पर अंतिम समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
मेट्रो सिटी समाचार इस मामले में संबंधित कंपनी, श्रम विभाग और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट करेगा।
मेट्रो सिटी समाचार | वसई-विरार की खबर, सीधे ग्राउंड से।
| जांच का विषय | सत्यापन की स्थिति |
|---|---|
| मजदूरों का विरोध प्रदर्शन | मेट्रो सिटी समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट |
| 12 घंटे काम और ₹15,000 पगार | कुछ मजदूरों के आरोप; भुगतान रिकॉर्ड नहीं मिला |
| भोजन में कीड़े | मजदूरों द्वारा दिखाई गई तस्वीरें; स्वतंत्र पुष्टि बाकी |
| कंपनी/डेवलपर | Conceptual Advisory Services LLP का सार्वजनिक RERA रिकॉर्ड उपलब्ध |
| RERA के तीन Phases | रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध |
| CC की विस्तृत मंजिलवार जानकारी | पूर्ण दस्तावेजी पुष्टि बाकी |
| साइट पर वास्तविक मजदूर संख्या | आधिकारिक आंकड़ा प्राप्त नहीं |
| लेबर कॉन्ट्रैक्टर की सूची | सत्यापित सूची प्राप्त नहीं |
| पिछला श्रम निरीक्षण | तारीख और रिपोर्ट प्राप्त नहीं |
| मैनेजमेंट का जवाब | ग्राउंड पर प्रतिक्रिया देने से इनकार; विस्तृत पक्ष लंबित |
ऑनलाइन सत्यापन के लिए प्रमुख स्रोत
- सुरक्षा स्मार्ट सिटी — आधिकारिक प्रोजेक्ट वेबसाइट: https://www.surakshasmartcity.com/
- MahaRERA — प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज: https://maharera.maharashtra.gov.in/
- महाराष्ट्र श्रम विभाग — Labour Codes: https://labour.maharashtra.gov.in/en/publication/new-labour-code
- महाराष्ट्र निर्माण मजदूर कल्याणकारी मंडल: https://mahabocw.in/
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