उल्हासनगर के एक सामाजिक कार्यकर्ता को खुद को ATS अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर कथित तौर पर ₹2.5 लाख भेजने को मजबूर किया। पुलिस ने रविवार, 1 नवंबर को तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। सोमवार को सामने आए पुलिस विवरण के मुताबिक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

कॉल मार्च में आया था, केस अब दर्ज हुआ

शिकायतकर्ता मुरलीधर हरपालदास मखीजा ने पुलिस को बताया कि मार्च में अनजान नंबर से WhatsApp कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को पुणे ATS का अफसर बताया। उस व्यक्ति ने मखीजा पर पाकिस्तानी मुखबिर होने का आरोप लगाकर डराने की कोशिश की। ये कॉल करने वाले के दावे थे, शिकायतकर्ता के खिलाफ साबित तथ्य नहीं।

शिकायत के अनुसार कॉल करने वाले ने बैंक खाते में ₹3 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन और लखनऊ की अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात भी कही। पुलिस विवरण से ऐसे लेनदेन या असली वारंट की पुष्टि नहीं होती। वीडियो कॉल के जरिए दबाव बनाए जाने की भी शिकायत है।

FD तोड़कर भेजी रकम

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के डर से मखीजा ने अपनी सावधि जमा से पैसे निकाले और बताए गए बैंक खाते में RTGS के जरिए ₹2.5 लाख भेजे। मामला अधिकारी बनकर पहचान बताने, धमकी और कथित धन हस्तांतरण से जुड़ा है। संबंधित खाते और आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका जांच के विषय हैं।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत केस दर्ज करने की जानकारी दी है। किसी गिरफ्तारी, रकम वापस मिलने या अंतिम आरोप तय होने की घोषणा उपलब्ध विवरण में नहीं है।

ऐसी कॉल आए तो शिकायत कैसे करें

गृह मंत्रालय की जानकारी के अनुसार साइबर वित्तीय ठगी की शिकायत में मदद के लिए 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल उपलब्ध हैं। भुगतान का रिकॉर्ड, कॉल नंबर और संदेश संभालना शिकायत में उपयोगी है। जल्दी सूचना देना जरूरी है, लेकिन उससे रकम वापसी की गारंटी नहीं मिलती।

अधिकारी बनकर डराने वाली साइबर ठगी की पृष्ठभूमि के लिए बीड में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी की पिछली रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। अनजान कॉल पर बताए निजी खाते में पैसे भेजने से पहले संबंधित संस्था के अधिकृत माध्यम से खुद पुष्टि करें।