दिवाली के दौरान पश्चिम रेलवे से यात्रा कर रहे लोगों के लिए सही टिकट और सही श्रेणी का ध्यान रखना जरूरी है। मुंबई मंडल में ‘ऑपरेशन दीप’ के तहत विशेष टिकट जाँच अभियान चल रहा है। इसकी अवधि 31 अक्टूबर से 14 नवंबर, 2026 तक बताई गई है। यह केवल प्लेटफॉर्म तक सीमित जाँच नहीं है; स्टेशन और ट्रेनों, दोनों में निरीक्षण होगा।

किन यात्रियों पर होगी नजर

अभियान का फोकस बिना टिकट यात्रा, गलत श्रेणी में सफर और टिकट से जुड़ी दूसरी अनियमितताओं पर है। नियमित टिकट लेकर यात्रा करने वाले लोगों की सुविधा तथा रेलवे की आय को नुकसान रोकना इसका उद्देश्य बताया गया है। भीड़ के बीच टिकट जाँच से छूट मिलने की धारणा रखना ठीक नहीं होगा।

चार चरणों में जाँच की व्यवस्था

DEEP नाम में Detect, Examine, Enforce और Penalize शामिल हैं। यानी अनियमित यात्रा का पता लगाना, टिकट और जरूरी दस्तावेज देखना, नियम लागू करना और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करना। इसे किसी नए ट्रेन टाइमटेबल या अतिरिक्त सेवा की घोषणा न समझें।

यात्रियों को अपने टिकट पर लिखे गंतव्य और श्रेणी के हिसाब से ही सफर करना चाहिए। किसी खास ट्रेन, पास या टिकट की वैधता पर संदेह हो तो चढ़ने से पहले अधिकृत टिकट कार्यालय से जानकारी लें। उपलब्ध अभियान विवरण में प्रत्येक उल्लंघन के लिए अलग दर का पूरा आधिकारिक चार्ट नहीं है, इसलिए एक समान जुर्माना रकम नहीं बताई जा रही है।

कर्मचारियों के लिए कैमरे का प्रयोग

टिकट जाँच के दौरान संवाद और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मुंबई सेंट्रल मंडल में बॉडी-वॉर्न कैमरे तथा विशेष काली जैकेट का प्रायोगिक इस्तेमाल भी बताया गया है। शुरुआती व्यवस्था में 15 कैमरे और 30 जैकेट का उल्लेख है। इसका मतलब हर जाँचकर्मी के पास कैमरा होना नहीं है।

टिकट जाँच के दौरान व्यवहार और शिकायतों का मुद्दा पहले भी सामने आया है। कांदिवली स्टेशन पर टिकट जाँच विवाद और रेलवे के पक्ष की पिछली रिपोर्ट में इसकी पृष्ठभूमि पढ़ सकते हैं। मौजूदा अभियान की जानकारी में उस घटना को इसका कारण नहीं बताया गया है।