लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी डिजिटल ढांचे और एप्लिकेशन की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए करीब ₹104 करोड़ की परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिली है। IIT कानपुर को तीन साल के लिए इसे लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें संभावित खतरों की लगातार निगरानी, घटना होने पर तकनीकी कार्रवाई और रखरखाव शामिल रहेगा।

निगरानी के साथ तकनीकी सहायता भी

27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस फैसले की जानकारी दी। उनके मुताबिक, IIT कानपुर राज्य की डिजिटल प्रणालियों और एप्लिकेशन के लिए निगरानी, साइबर घटना पर प्रतिक्रिया, रखरखाव और तकनीकी सहायता देगा।

लगभग ₹104 करोड़ के अनुमान में संचालन और रखरखाव का खर्च भी शामिल है। जिम्मेदारी की अवधि तीन वर्ष रखी गई है। इसका मकसद संभावित साइबर खतरों की पहचान और उनके सामने आने पर कार्रवाई की क्षमता बढ़ाना है।

डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा पर फोकस

परियोजना के तहत साइबर सुरक्षा ऑपरेशंस सेंटर की व्यवस्था IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा से जुड़े C3iHub के माध्यम से तैयार की जानी है। सरकारी कामकाज में डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा, निगरानी और तकनीकी सहायता को एक साथ संभालना इस फैसले का केंद्र है।

मंजूरी मिली, शुरू होने की तारीख अलग विषय

कैबिनेट का फैसला परियोजना की मंजूरी से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी में पूरा केंद्र किस तारीख से चालू होगा, सभी विभाग कब इससे जुड़ेंगे या आम नागरिक के लिए कोई नया शिकायत नंबर कब शुरू होगा, इसका कार्यक्रम नहीं दिया गया है। इसलिए इसे अभी नई सार्वजनिक साइबर हेल्पलाइन शुरू होने की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।