विरार–अलीबाग कॉरिडोर की प्रस्तावित जमीन पर निर्माण और मुआवजे से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच का दायरा बढ़ा है। सोमवार, 2 नवंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक 10 और लोगों पर मामला दर्ज हुआ है। इस तरह केस में नामजद लोगों की कुल संख्या 24 बताई गई है। यह कुल गिरफ्तारियों का आंकड़ा नहीं है।
पुराने साल की घरपट्टी दिखाने का आरोप
जांच में आरोप है कि वसई पूर्व के कामण, सारजामोरी और पोमण क्षेत्र में नए निर्माणों को पुराने निर्माण के रूप में दिखाने की कोशिश हुई। 2022–23 में बने ढांचों के लिए 2018–19 की घरपट्टी दिखाने की कथित गड़बड़ी की पड़ताल हो रही है। मकसद सरकारी मुआवजा हासिल करना बताया गया है; रकम वास्तव में मिल चुकी थी, इसकी पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
नायगांव पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक संजय हजारे के हवाले से दी गई जानकारी में तत्कालीन ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की जांच का उल्लेख है। सभी की व्यक्तिगत भूमिका और दस्तावेजी जिम्मेदारी जांच के विषय हैं।
पहले चार लोगों की गिरफ्तारी हुई थी
इस मामले की चार आरोपियों की गिरफ्तारी और कथित फर्जी दस्तावेजों पर पिछली रिपोर्ट में 23 अक्टूबर की पुलिस प्रेस नोट का विवरण दिया गया था। उसके मुताबिक तलाठी की शिकायत पर नायगांव थाने में मामला दर्ज हुआ और निर्माणों तथा घरपट्टी से जुड़े कागजात जांच के केंद्र में थे।
नई जानकारी जांच में और लोगों के जुड़ने से संबंधित है। इसे पहले गिरफ्तार चार लोगों से अलग 10 नई गिरफ्तारियों या 24 लोगों की दोषसिद्धि के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए। नए आरोपियों की गिरफ्तारी, अदालत के आदेश और व्यक्तिगत धाराओं का पूरा विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
पैसा लगाने वालों से आगे आने की अपील
इन निर्माणों में खरीद या निवेश करने वाले नागरिकों से शिकायत के लिए सामने आने का पुलिस ने आह्वान किया है। संबंधित लोगों के दस्तावेज और लेनदेन इस जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। मुआवजे के दावे की वैधता और धोखाधड़ी के आरोपों पर आगे की स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।




