वसई-विरार में सीवेज के उपचार और उसके दोबारा उपयोग की व्यवस्था बढ़ाने के लिए दो प्रकल्पों की निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची है। नालासोपारा पश्चिम के झोन-4 और नवघर-माणिकपुर के झोन-6 में ठेकेदार नियुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इन प्रकल्पों के चालू होने की तारीख अभी सामने नहीं आई है।

कहां कितनी क्षमता प्रस्तावित है

7 नवंबर को सामने आए प्रकल्पों के ब्योरे के अनुसार नालासोपारा पश्चिम में ₹321.88 करोड़ के प्रकल्प से रोज 34.5 मिलियन लीटर सीवेज के उपचार की योजना है। नवघर-माणिकपुर में ₹496.56 करोड़ के प्रकल्प की प्रस्तावित क्षमता 47 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। दोनों काम नगरोत्थान अभियान के तहत आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

पानी के पुनः उपयोग का उद्देश्य

मनपा के जलापूर्ति विभाग से संबंधित प्रकाशित ब्योरे में उपचारित पानी का उपयोग निर्माण, उद्योग, बाग-बगीचों और अन्य गैर-पेय जरूरतों में करने की बात कही गई है। शहर के सीवेज प्रबंधन पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसका पुराना संदर्भ बोळींज के सीवेज प्रकल्प पर उठे सवालों की रिपोर्ट में उपलब्ध है; उस रिपोर्ट में दर्ज आरोपों को नई निविदाओं का निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए।

नालासोपारा पूर्व का काम अलग है

इससे अलग नालासोपारा पूर्व में 103 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का प्रकल्प निर्माणाधीन है। उसके लिए मार्च 2027 का लक्ष्य बताया गया है। अक्टूबर 2026 के पूर्ववर्ती प्रकल्प-ब्योरे में भी नालासोपारा पूर्व की भूमिगत सीवर योजना पर काम जारी होने की जानकारी थी।

19 अक्टूबर को सामने आए नगर नियोजन संबंधी विवरण में बढ़ती आबादी के लिए पानी और सीवेज ढांचे को साथ विकसित करने की जरूरत बताई गई थी। उसी समय खोलसापाड़ा स्रोत और तृतीय स्तर के उपचार केंद्र के लिए तकनीकी सलाहकार नियुक्त करने का प्रस्ताव भी चर्चा में था। प्रस्ताव, निविदा और चालू सुविधा अलग-अलग चरण हैं; नागरिकों को वास्तविक लाभ प्रकल्पों के पूरा होने और सेवा शुरू होने पर मिलेगा।