लातूर, महाराष्ट्र: जिस फसल को किसान ने बूंद-बूंद पानी देकर बचाया, वही फसल बाजार में भाव गिरने के बाद उसके लिए घाटे का सौदा बन गई। लातूर जिले के दापक्याळ गांव में एक किसान ने लागत और मेहनत का खर्च भी नहीं निकल पाने के कारण अपनी टमाटर की फसल खेत और सड़क पर फेंक दी।
दापक्याळ गांव के किसान मैनोद्दीन शेख ने कर्ज लेकर टमाटर की खेती की थी। जिले में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसल को बचाने के लिए उन्हें हजारों रुपये खर्च कर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ा। बूंद-बूंद पानी देकर किसान ने किसी तरह अपनी फसल को तैयार किया।
लेकिन जब टमाटर की फसल बाजार में पहुंची तो भाव में भारी गिरावट आ गई। किसान के मुताबिक, एक कैरेट टमाटर के लिए महज 100 रुपये तक का भाव मिलने लगा। ऐसे में टमाटर तोड़ने के लिए मजदूरी, पैकिंग और बाजार तक परिवहन का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया।
आखिरकार किसान के सामने अपनी तैयार फसल को फेंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। जिस टमाटर की फसल को किसान ने महीनों तक अपने बच्चों की तरह संभाला, वही फसल अब उसके लिए आर्थिक बोझ बन गई।
यह तस्वीरें सिर्फ सड़क पर बिखरे टमाटरों की नहीं हैं, बल्कि उस किसान की मजबूरी को दिखाती हैं जिसने कर्ज लेकर खेती की, पानी खरीदकर फसल बचाई और अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद में मेहनत की।
टमाटर की फसल तो बच गई, लेकिन बाजार भाव ने किसान की उम्मीदों को तोड़ दिया।
अब सवाल यह है कि कर्ज लेकर खेती करने वाले ऐसे किसानों को उनकी लागत का उचित मूल्य कौन देगा? जब बाजार भाव इतना गिर जाए कि फसल को खेत से मंडी तक ले जाने का खर्च भी न निकले, तब किसान के लिए सरकार की सहायता और प्रभावी बाजार व्यवस्था कितनी जरूरी है, यह घटना एक बार फिर सामने लाती है।
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