मुंबई/वसई-विरार: वसई-विरार में कथित अवैध निर्माण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नगरसेवक सीताराम गुप्ता को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने गुप्ता को जमानत देने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज हुई कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें 41 इमारतों के कथित अवैध निर्माण का मामला सामने आया था।
करीब 13 महीने जेल में रहने के बाद मिली राहत
हाईकोर्ट ने जमानत पर फैसला सुनाते समय मामले की जांच और गिरफ्तारी की टाइमलाइन को भी ध्यान में रखा। अदालत के अनुसार, पहली FIR दर्ज होने के करीब दो साल बाद गुप्ता की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तारी के बाद वह लगभग 13 महीने जेल में रहे और जांच में सहयोग भी किया।
गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और अधिवक्ता मिथिलेश मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ कथित इकबालिया बयान के अलावा कोई अन्य ठोस आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुप्ता की 20 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां अटैच की हैं और मामले में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
ED ने जमानत का किया विरोध
दूसरी ओर, ED की तरफ से विशेष लोक अभियोजक चैतन्य पेंडसे ने जमानत का विरोध किया। जांच एजेंसी ने गुप्ता पर सरकारी जमीन से जुड़े कथित षड्यंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया।
ED की दलील के मुताबिक, मामले में सामने आए एक गवाह ने आरोप लगाया था कि गुप्ता कथित तौर पर गरीब लोगों और जमीन मालिकों को अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार करते थे।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी गौर किया कि कथित इकबालिया बयान को छोड़कर गुप्ता को मामले में आरोपी ठहराने के लिए अन्य कोई बयान सामने नहीं आया है। अदालत ने गिरफ्तारी और जांच से जुड़ी पूरी टाइमलाइन को देखते हुए प्रथम दृष्टया जमानत का आधार माना।
इसके बाद हाईकोर्ट ने गुप्ता को ₹1 लाख के जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का निर्देश दिया। जमानत के साथ अदालत ने अन्य शर्तें भी लागू की हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।