Vasai Virar : महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों को यात्रियों से संवाद के लिए व्यवहारिक मराठी भाषा का ज्ञान हो, इस उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा चलाया गया मराठी भाषा प्रशिक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा। यह जानकारी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंत्रालय में आयोजित पत्रकार परिषद में दी।
सरनाईक ने बताया कि परिवहन विभाग की सामाजिक प्रतिबद्धता के तहत चलाए गए 105 दिनों के विशेष अभियान में राज्य के करीब 1 लाख 65 हजार 800 रिक्शा-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया है। इस अभियान को चालकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
जिन रिक्शा-टैक्सी चालकों ने अभी तक मराठी भाषा का प्रशिक्षण नहीं लिया है, उनके लिए कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के माध्यम से कार्यशालाएं आगे भी जारी रहेंगी। मुंबई, ठाणे, भिवंडी, नालासोपारा, वसई-विरार और नवी मुंबई क्षेत्र के प्रशिक्षण केंद्रों की जानकारी संबंधित आरटीओ अधिकारियों को दी गई है। प्रशिक्षण केंद्रों की जानकारी के लिए जल्द ही अलग संपर्क नंबर भी जारी किया जाएगा।
4 महीने की निश्चित मोहलत नहीं
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि रिक्शा-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए सीधे तौर पर 4 महीने की निश्चित मोहलत नहीं दी गई है। संबंधित चालकों को शुरुआत में 1 महीने की अवधि दी जाएगी।
इस प्रक्रिया में संबंधित कानून के तहत बैज निलंबित करने की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, इन तीन महीनों की अवधि के दौरान बैज रद्द नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कोई चालक जानबूझकर मराठी भाषा सीखने से इनकार करता है, तो कानून के अनुसार उसका बैज रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।
अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील
सरनाईक ने कहा कि मुंबई और ठाणे क्षेत्र का माहौल खराब करने का कुछ समाजकंटकों द्वारा जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार रिक्शा-टैक्सी संगठनों के पदाधिकारियों और नेताओं के साथ लगातार संवाद कर रही है। उनके सुझावों पर विचार किया जाएगा और किसी के खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर कामगार नेता शशांक राव तथा कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के पदाधिकारी उपस्थित थे।
परिवहन मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ को आगे भी लगातार जारी रखने की सरकार की नीति है।