वसई-विरार / ठाणे | मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) और घोड़बंदर रोड पर मंगलवार को भीषण ट्रैफिक जाम ने हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। लगातार करीब दो घंटे से अधिक समय तक दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे लोग घंटों सड़क पर फंसे रहे।
जानकारी के अनुसार, गुजरात से ठाणे की ओर आने वाले मार्ग पर घोड़बंदर रोड तक लगभग 10 से 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। वहीं मुंबई से गुजरात जाने वाली लेन पर कश्मीरा (Kashimira), मीरा रोड से लेकर वसई सीमा के मालाजीपाड़ा (Maljipada) तक करीब 15 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई।
बारिश के बीच हाईवे पर रेंगते वाहनों के कारण कार, बस, ट्रक, कंटेनर और अन्य मालवाहक वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे। कई यात्रियों ने बताया कि सामान्य दिनों में 20 से 30 मिनट का सफर तय करने में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग रहा है।
इस भीषण जाम का सबसे अधिक असर कार्यालयों से लौट रहे कर्मचारियों, छात्रों, लंबी दूरी की बसों में सफर कर रहे यात्रियों और मरीजों पर पड़ा। कई एम्बुलेंस भी ट्रैफिक में फंस गईं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई।
कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि हाईवे पर वाहन कई-कई मिनट तक एक ही स्थान पर खड़े रहे। परिवारों के साथ यात्रा कर रहे लोगों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लगातार हो रही बारिश और वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। हाईवे पर भारी मालवाहक वाहनों की संख्या अधिक होने से भी जाम की स्थिति और गंभीर होती चली गई।
ट्रैफिक पुलिस मौके पर यातायात को सामान्य करने का प्रयास करती रही, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कई स्थानों पर वाहन धीमी गति से ही आगे बढ़ रहे थे।
यातायात विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले ट्रैफिक अपडेट अवश्य देखें और यदि संभव हो तो वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। साथ ही अनावश्यक यात्रा से बचने और पर्याप्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह भी दी गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुंबई-अहमदाबाद हाईवे और घोड़बंदर रोड पर लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को देखते हुए स्थायी यातायात प्रबंधन, बेहतर समन्वय और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था समय की आवश्यकता बन गई है। लगातार लगने वाले जाम से लाखों यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा है और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
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