मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का विशेष कार्य अधिकारी यानी OSD होने का दावा कर एक सिविल ठेकेदार से कथित तौर पर ₹3.25 करोड़ लेने के मामले में मरीन ड्राइव पुलिस ने 40 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने लोक निर्माण विभाग के करीब ₹50 करोड़ के लंबित बिल मंजूर कराने का भरोसा दिया और इसके बदले लगातार रकम मांगी।
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान आसिफ इस्माइल पठान के रूप में हुई है, जो छत्रपति संभाजीनगर का निवासी बताया गया है। उसे अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने पूरे लेन-देन, कथित सहयोगियों और रकम की बरामदगी के लिए हिरासत मांगी। अदालत ने आरोपी को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।
₹50 करोड़ के बिल पास कराने का दिया भरोसा
पुलिस शिकायत के अनुसार, अकोला की एक निर्माण कंपनी से जुड़े ठेकेदार के लोक निर्माण विभाग में लगभग ₹50 करोड़ के भुगतान लंबित थे। आरोप है कि पठान ने खुद को मंत्रालय से जुड़ा वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री का OSD बताया। उसने दावा किया कि वह अपने प्रभाव से लंबित बिलों की मंजूरी और भुगतान करा सकता है।
ठेकेदार को भरोसा दिलाने के लिए आरोपी ने कथित रूप से एक अन्य व्यक्ति से भी संपर्क कराया, जिसने सरकारी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की क्षमता होने की बात कही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी भरोसे में अलग-अलग समय पर कुल ₹3.25 करोड़ दिए गए। इसके बाद भी आरोपी ने कथित तौर पर अतिरिक्त ₹75 लाख की मांग की और भुगतान न करने पर पहले दी गई रकम तथा लंबित बिल दोनों डूबने की धमकी दी।
मंत्रालय में जांच की तो खुली पोल
बार-बार रकम मांगे जाने पर ठेकेदार को संदेह हुआ। शिकायत के मुताबिक उसने मंत्रालय पहुंचकर आरोपी की पहचान और पद की जांच की। वहां पता चला कि संबंधित व्यक्ति मुख्यमंत्री कार्यालय या मंत्रालय का अधिकारी नहीं है। इसके बाद मरीन ड्राइव पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपी ने सरकारी अधिकारी जैसा भरोसा पैदा करने के लिए किन दस्तावेजों, फोन नंबरों, पहचान-पत्रों या संपर्कों का उपयोग किया। जांच का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा रकम की मनी ट्रेल है—पैसा नकद दिया गया या बैंक खातों में, किन लोगों तक पहुंचा और क्या उसका कोई हिस्सा संपत्ति या वाहन खरीदने में लगाया गया।
क्या दूसरे ठेकेदार भी बने निशाना?
पुलिस को आशंका है कि सरकारी बिल मंजूर कराने का दावा कर अन्य ठेकेदारों से भी संपर्क किया गया हो सकता है। आरोपी के फोन, बैंक खातों और संपर्कों की जांच के साथ कथित सहयोगियों की तलाश की जा रही है। पुलिस उस वाहन को भी जब्त करने की प्रक्रिया में है जिसका इस्तेमाल लेन-देन या मुलाकातों के दौरान किए जाने का संदेह है।
सरकारी कार्यालय के नाम पर होने वाली ठगी में आरोपी अक्सर असली अधिकारी का नाम, मंत्रालय की भाषा और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी का इस्तेमाल कर भरोसा बनाते हैं। किसी भी व्यक्ति को अधिकारी बताकर कमीशन या नकद रकम मांगने पर संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर और कार्यालय से उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है। सरकारी बिल पास कराने के लिए निजी व्यक्ति को बड़ी राशि देना स्वयं शिकायतकर्ता के लिए भी गंभीर वित्तीय और कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।
MCS ने इससे पहले मुंबई में फर्जी DCP बनकर कथित करोड़ों की ठगी और नेता की पहचान व AI आवाज के कथित दुरुपयोग वाले मामले की रिपोर्ट दी थी। मौजूदा मामले में पुलिस हिरासत के दौरान रकम की बरामदगी और अन्य लोगों की भूमिका पर आगे जानकारी सामने आ सकती है।




