नालासोपारा: इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे मरीज के बेड तक दो लोग कैसे पहुंच गए और वार्ड के भीतर कथित मारपीट की नौबत क्यों आई? नालासोपारा पश्चिम स्थित महानगरपालिका अस्पताल में भर्ती कलीमुल्ला से जुड़े इस मामले में अब अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आया है। मनपा अस्पताल के डॉक्टर गौरव बाघ ने बताया कि दोनों व्यक्ति खुद को भर्ती मरीज का रिश्तेदार बताकर भीतर गए थे। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार पुलिस द्वारा दर्ज एनसीआर से संतुष्ट नहीं है और एफआईआर की मांग कर रहा है।
घटना शनिवार, 31 अक्टूबर की तड़के करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वार्ड के भीतर मरीज के बेड के पास हंगामे जैसी स्थिति नजर आती है। वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती; मामले की पूरी तस्वीर पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही साफ होगी।
डॉक्टर गौरव बाघ ने क्या बताया?
डॉक्टर गौरव बाघ के अनुसार, अस्पताल में भर्ती कलीमुल्ला और उनकी पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो रही थी। प्रशासन को मिली जानकारी के मुताबिक, इसी दौरान पत्नी ने अपने दो भाइयों को अस्पताल बुलाया। आरोप है कि दोनों अस्पताल पहुंचे, वार्ड में गए और वहां भर्ती कलीमुल्ला के साथ मारपीट की।
डॉक्टर बाघ ने बताया कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा रक्षकों ने दोनों व्यक्तियों से ऊपर जाने का कारण पूछा था। जवाब में उन्होंने कहा कि उनका एक रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती है और वे उससे मिलने आए हैं। रिश्तेदारी बताने के कारण सुरक्षाकर्मियों को उनके इरादों पर संदेह नहीं हुआ और उन्हें भीतर जाने दिया गया। अस्पताल प्रशासन का पक्ष है कि दोनों ने मुलाकात का कारण बताकर प्रवेश लिया और उसके बाद कथित घटना हुई।
सुरक्षा में लापरवाही के आरोप से प्रशासन असहमत
वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुरक्षा, रात के समय आने वाले लोगों की पहचान और वार्ड तक पहुंच की प्रक्रिया पर सवाल उठे। प्रशासन ने कहा है कि सुरक्षा रक्षकों ने पूछताछ की थी, लेकिन दोनों व्यक्तियों ने रिश्तेदार से मिलने की बात कही। इस आधार पर अस्पताल पक्ष ने इसे सुरक्षाकर्मियों को गुमराह कर प्रवेश लेने का मामला बताया है और सुरक्षा में सीधी लापरवाही के आरोप से असहमति जताई है।
हालांकि, अब यह जांच का विषय है कि अस्पताल के विजिटर रिकॉर्ड में दोनों के आने-जाने का विवरण दर्ज हुआ था या नहीं, घटना के समय वार्ड में कौन-कौन मौजूद था और हंगामे के बाद अस्पताल की ओर से तत्काल क्या कदम उठाए गए। इन सवालों पर पुलिस और अस्पताल की आगे की विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
पीड़ित पक्ष बोला—रात में ही थाने जाना पड़ा
पीड़ित के एक परिचित ने आरोप लगाया कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन से अपेक्षित सहायता नहीं मिली, जिसके चलते परिवार को रात में ही नालासोपारा पुलिस स्टेशन जाना पड़ा। पीड़ित पक्ष के अनुसार, पुलिस ने मामले में एनसीआर दर्ज की है। परिवार का कहना है कि अस्पताल में भर्ती मरीज के साथ हुई घटना गंभीर है, इसलिए दोनों कथित हमलावरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
परिवार के सदस्य शनिवार को दोबारा नालासोपारा पुलिस स्टेशन पहुंचे और एफआईआर के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया शुरू की। खबर लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज होने या किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। इस मामले में किसी अदालत ने आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
अब किन सवालों के जवाब बाकी?
मामले में सबसे अहम सवाल कथित हमले से पहले हुए विवाद, दोनों व्यक्तियों के अस्पताल में प्रवेश, वार्ड में हुई घटना और उसके बाद की कार्रवाई से जुड़े हैं। वायरल वीडियो, अस्पताल के संभावित सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और मौजूद लोगों के बयान जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत पर आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
वसई-विरार में मनपा अस्पतालों की सेवाओं और मरीज सुविधाओं से जुड़ी MCS की यह रिपोर्ट भी पढ़ें।
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