लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पात्र कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की दर 63 प्रतिशत कर दी गई है। 7 नवंबर 2026 को जारी शासनादेश के बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार, नई दर 1 जुलाई 2026 से प्रभावी है। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नवंबर के नियमित वेतन के साथ दिया जाएगा। जुलाई से अक्टूबर के बकाये के लिए अलग भुगतान व्यवस्था रखी गई है।

किसे मिलेगा लाभ

आदेश के दायरे में राज्य कर्मचारी, सहायता प्राप्त शैक्षिक और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के नियमित पूर्णकालिक कर्मचारी, शहरी स्थानीय निकायों की पात्र श्रेणियां, कार्य-प्रभारित कर्मचारी और UGC वेतनमान पाने वाले कर्मचारी बताए गए हैं। हर संस्थान में सभी प्रकार की नियुक्तियां अपने आप इसके दायरे में नहीं आ जातीं; कर्मचारी को अपनी सेवा श्रेणी के अनुसार पात्रता देखनी होगी।

यह महंगाई भत्ते की दर है, पूरे वेतन में 63 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की घोषणा नहीं। नवंबर के वेतन में संशोधित दर लागू होने और पिछली अवधि का बकाया मिलने को भी अलग-अलग समझना जरूरी है।

चार महीने का बकाया अलग तरीके से

जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 की अवधि का बकाया संबंधित कर्मचारी की भविष्य निधि या पेंशन व्यवस्था के अनुसार निपटाया जाएगा। सामने आए आदेश-विवरण में GPF और NPS से जुड़े कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान तथा सेवानिवृत्त या निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वालों के लिए विशेष व्यवस्था का उल्लेख है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी को चार महीने का पूरा बकाया नवंबर की तनख्वाह के साथ नकद मिल जाएगा। भुगतान का तरीका और लागू कटौतियां संबंधित कार्यालय के वेतन अनुभाग से स्पष्ट होंगी। इस खबर में किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत देय राशि की गणना नहीं की गई है।

वेतन पर्ची में क्या देखें

कर्मचारी नवंबर की वेतन पर्ची में लागू DA दर और बकाये की अलग प्रविष्टि देखें। सेवा श्रेणी, निधि खाता या सेवानिवृत्ति की स्थिति से जुड़ी शंका हो तो अपने कार्यालय के आहरण-वितरण अधिकारी से शासनादेश के अनुसार जानकारी लें।

कर्मचारियों के लाभ से जुड़े एक अलग फैसले में यूपी के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की मंजूरी दी गई थी। चिकित्सा सुविधा और महंगाई भत्ता अलग व्यवस्थाएं हैं; एक की पात्रता से दूसरे का लाभ स्वतः तय नहीं होता।